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क्या मिजोरम में इस बार चमकेगी महिलाओं की किस्मत !

Mon, 12 Nov 2018 07:01 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला
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भाजपा नेत्री जूडी
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क्या पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में इस महीने होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं की किस्मत चमकेगी? लाख टके के इस सवाल का जवाब फिलहाल न तो किसी राजनीतिक पार्टी के पास है और न ही राज्य के लोगों के। वैसे, इस राज्य में हर क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम है। राजधानी आइजल की दुकानों और बाजारों, होटलों, निजी व सरकारी दफ्तरों में महिलाओं की तादाद ही ज्यादा है। लेकिन जब बात राजनीति की हो तो विधानसभा में इनकी मौजूदगी कहीं नजर आती है। यह अपने-आप में विरोधाभासी लग सकता है लेकिन यही हकीकत है।
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फिलहाल राज्य के 40 विधायकों में से एक ही महिला है। वानलालम्पुई चांग्थू नामक यह महिला विधायक ललथनमहवला सरकार में मंत्री है। लेकिन वह भी उपचुनावों में जीती थी। राजनीतिक दलों की दलील रही है कि महिलाओं को राजनीति में दिलचस्पी नहीं है। यही वजह है कि वे उनको टिकट नहीं देते। दिलचस्प बात यह है कि खुद महिलाएं भी इसी बात पर भरोसा करती हैं। ऐसा नहीं होता तो पुरुषों के मुकाबले महिला वोटरों की ज्यादा तादाद वाले इस राज्य में चुनावी रिकार्ड इतना खराब नहीं होता।

इस बार भी तस्वीर में खास बदलाव की उम्मीद नहीं है। सत्तारूढ़ कांग्रेस ने इस बार भी सिर्फ एक ही महिला वानलालम्पुई चांग्थू को टिकट दिया है। राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी और अबकी सत्ता में वापसी के सपने देख रहे मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने तो किसी महिला को टिकट नहीं दिया है। क्षेत्रीय दलों के गठजोड़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) ने दो महिलाओं को टिकट जरूर दिया है, लेकिन उनके जीतने की कोई संभावना नहीं है। पहली बार राज्य की सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही भाजपा ने अपवाद के तौर पर छह महिलाओं को टिकट दिया है, लेकिन उनमें से कितनों को जीत नसीब होगी, यह कहना कठिन है।
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भाजपा उम्मीदवार जूडी जोमिंग्लियानी कहती हैं कि मिजो समाज पुरुष प्रधान है। यहां फैसला करने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी नहीं के बराबर है, लेकिन इस मानसिकता को तोड़ने के लिए उन्होंने राजनीति में उतरने का फैसला किया है। जूडी की राजनीति में यह दूसरी पारी है। तीन दशक पहले वे कांग्रेस की सक्रिय सदस्य थी। लेकिन बाद में राजनीति छोड़कर वे अपना कारोबार करने लगीं।

मिजोरम के राज्य बनने के बाद 46 वर्षों के चुनावी इतिहास में महज चार महिलाएं ही चुनाव जीत सकी हैं। यह नगालैंड के बाद सबसे खराब रिकार्ड है। नगालैंड में तो आज तक कोई महिला चुनाव नहीं जीत सकी है। जेडपीएम के टिकट पर डंपा सीट से मैदान में उतरी लालरिनलुआंगी कहती हैं कि मिजोरम में महिलाएं हर क्षेत्र में सक्रिय हैं। लेकिन उनको गृहिणी की भूमिका में ही देखा जाता है।

राज्य में महिलाओं के सबसे बड़े संगठन मिजो वुमेन वेलफेयर फेडरेशन की महासचिव टी. लालथांगपुई कहती हैं कि हम चाहते हैं कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़े। इसलिए इस बार हमने अपने सदस्यों से महिला उम्मीदवारों को वोट देने की अपील की है। वे चाहे किसी भी पार्टी की क्यों न हों।
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