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Exclusive: 'मिजोरम में पढ़ रहे शरणार्थी बच्चे, रख रहे हैं पूरी निगरानी', शिक्षा मंत्री ने बताई आगे की रणनीति

सार

मिजोरम के शिक्षमंत्री डॉ. डेविड वनलालथलाना ने कहा कि मिजोरम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने के लिए तैयार है। हमें केंद्र सरकार का हर कदम पर साथ मिल रहा है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा के नेतृत्व में राज्य अगले पांच वर्षों में नए मुकाम हासिल करेगा।
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मिजोरम के शिक्षा मंत्री - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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मिजोरम के शिक्षमंत्री डॉ. डेविड वनलालथलाना ने कहा है कि पड़ोसी मुल्कों में लगातार बिगड़ते हालातों के कारण म्यांमार और बांग्लादेश के शरणार्थियों और मणिपुर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से विस्थापित लोगों के बच्चे मिजोरम के शरणार्थी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। हम उन पर पूरी निगरानी रखते हैं। जब वहां हालात ठीक होते हैं, तो वे वापस भी चले जाते हैं। उन्होंने कहा, इसके अलावा मणिपुर में जब हालात खराब थे, तब वहां के विद्यार्थी भी यहां पढ़ने आए थे। अब काफी संख्या में वे वापस चले गए हैं। शिक्षमंत्री डॉ. डेविड वनलालथलाना ने यह बात आइजोल में अमर उजाला के साथ खास मुलाकात में कही। उन्होंने कहा, राज्य नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने में पूरी तरह से तैयार है। इसके साथ ही राज्य को साक्षरता दर में पहला राज्य बनाने के लिए भी मुख्यमंत्री लालदुहोमा के नेतृत्व में हम काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, राज्य सरकार को केंद्र सरकार की पूरा सहयोग मिल रहा है, जिससे राज्य का विकास तेजी से हो रहा है।

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बॉयोमेट्रिक पंजीकरण करेंगे शुरू
उन्होंने कहा, राज्य सरकार म्यांमार के शरणार्थियों का बायोमेट्रिक पंजीकरण शुरू करने वाली है। ताकि पूरी तरह से निगरानी रखी जा सके। हालांकि अभी तक यह शुरू नहीं हो पाया है, इसके लिए सरकार केंद्रीय गृहमंत्रालय के संपर्क में है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में 41,355 शरणार्थी शरण ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से 33,505 शरणार्थी म्यांमार के हैं, 2,217 बांग्लादेश से हैं, जबकि राज्य में मणिपुर के 2,633 आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति भी हैं।

घटती-बढ़ती रहती है संख्या
उन्होंने कहा, छात्रों की संख्या का रिकॉर्ड रखना मुश्किल होता है। कभी यह संख्या छह हजार तो कभी दस हजार भी हो सकती है। क्योंकि जब हालात खराब होते हैं तो वे आते हैं और जैसे ही हालात ठीक हो जाते हैं, वे चले जाते हैं। उन्होंने बताया कि मणिपुर में जब हालात ठीक नहीं थे, तब यहां पर विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन हालात सामान्य होने पर बहुत से विद्यार्थी वापस चले गए।
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नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए राज्य तैयार
शिक्षमंत्री डॉ. वनलालथलाना ने कहा है कि मिजोरम सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। जमीनी स्तर पर अभी कुछ दिक्कतें हैं और हमने अपनी बात केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भी अवगत कराया है। हमें पूरा विश्वास है कि जो दिक्कत हैं, हम उनको सुलझा लेंगे और देश में नई शिक्षा नीति लागू करने वाले राज्यों में मिजोरम एक होगा। उन्होंने कहा, खुद मैंने लगभग 20 वर्षों तक कॉलेज में पढ़ाया है, और मैंने देखा है कि शिक्षा में काफी बदलाव की जरूरत है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों के लिए भविष्य के राह खोलेंगे।

शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने पर जोर
शिक्षामंत्री ने कहा, प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता की सुधार में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में साक्षरता दर भी बहुत अच्छी है। उच्च शिक्षा में भी सुधार की जरूरत है। हमारे यहां के बच्चों को बाहर पढ़ने नहीं जाना पड़े, इसकी भी कोशिश जारी है। उन्होंने कहा, शिक्षकों की नियुक्ति में भी सुधार की जरूरत है। हम ने अपने इंटरव्यू में बदलाव किया है, ताकि हम प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को शामिल कर सकें। प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और लिखित परीक्षा दोनों अनिवार्य होंगे। इससे शिक्षक की गुणवत्ता में बदलाव आएगा। हम केवल ऐसे शिक्षक नहीं चाहते जो अच्छी तरह से लिख सकते हों, बल्कि हम ऐसे शिक्षक चाहते हैं जो बेहतर पढ़ा सकें।

आगे बढ़ रहा राज्य, मिल रहा केंद्र का सहयोग
शिक्षा मंत्री ने कहा, हमारी पार्टी (जेडपीएम) को पहली बार लोगों ने मौका दिया है। हमारी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने और किसानों पर खास ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। पिछले एक वर्ष में प्रदेश विकास की दिशा में आगे बढ़ चला है। यहां की चीजें अब विदेशों में निर्यात होने लगी हैं। प्रदेश के विकास में केंद्र सरकार का हर कदम पर साथ मिल रहा है। मैं कह सकता हूं कि मुख्यमंत्री लालदुहोमा के नेतृत्व में राज्य अगले पांच वर्षों में नए मुकाम हासिल करेगा।

मुख्यमंत्री ने विस्थापितों के लिए केंद्र से मांगी मदद
इस बीच, मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मिजोरम में वर्तमान में म्यांमार, बांग्लादेश और मणिपुर से लगभग 41,000 से अधिक विस्थापित व्यक्तियों को शरण दे रहा है। राज्य एक महत्वपूर्ण मानवाधिकार संकट से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने चल रहे संकट को रेखांकित करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीमित संसाधनों के कारण इन विस्थापित व्यक्तियों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में संघर्ष कर रही है। उन्होंने राज्य पर बढ़ते बोझ शरणार्थियों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार से मदद की अपील की।

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