मिजोरम में सत्तारुढ़ कांग्रेस ने विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और भाजपा में गोपनीय साठ-गांठ का आरोप लगाया है। नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस (नेडा) में सहयोगी होने के बावजूद इस महीने होने वाले विधानसभा चुनावों में यह दोनों पार्टियां अलग-अलग मैदान में हैं। एमएनएफ औऱ भाजपा नेताओं ने आपस में कोई चुनावी तालमेल नहीं करने की बात कही है। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि इस एलान के बावजूद दोनों के बीच गोपनीय मिलीभगत है।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता लालियानछुंगा कहते हैं कि दोनों पार्टियों के बीच गोपनीय तालमेल है। उनका कहना है कि यह दोनों सहयोगी दल हैं। ऐसे में महज वोटरों को भ्रमित करने के लिए ही दोनों ने तालमेल नहीं करने का एलान किया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा की हिंदुत्ववादी छवि के नकारात्मक असर से बचने के लिए ही एमएनएफ के नेता उससे दूरी बरतने की बात कर रहे हैं। लेकिन चुनावों के बाद दोनों खुले तौर पर हाथ मिला लेंगे।
कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में राज्य के ताकतवर संगठन सेंट्रल यंग मिजो एसोसिएशन के हालिया बयान का हवाला दिया है। एसोसिएशन ने एमएनएफ नेतृत्व को ऐसी किसी गतिविधि से दूर रहने को कहा था कि जिससे राज्य की एकता व अखंडता को कोई नुकसान पहुंचे। उसने कहा था कि भाजपा के नेता ब्रू व चकमा वोटरों से एमएनएफ को वोट देने की अपील कर रहे हैं।
मिजोरम प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष डा. लालमालसामा इस मामले में त्रिपुरा भाजपा की महासचिव प्रतिमा भौमिक के बयान का भी हवाला देते हैं। यहां चुनाव प्रचार के लिए आई भौमिक ने कहा था कि राज्य में भाजपा व एमएनएफ मिल कर अगली सरकार का गठन करेंगे।
कांग्रेस का दावा है कि आपसी तालमेल की वजह से ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जे.वी.लूना ने आखिरी मौके पर अपनी सीट बदल दी। अब वे आइजल पूर्व-1 की बजाय तावी सीट से लड़ेंगे। आइजल पूर्व-1 सीट पर एमएनएफ अध्यक्ष जोरमथांगा मैदान में हैं।