भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की राष्ट्रीय महत्व की सूची से कई लापता पुरातात्विक स्मारक और स्थल हटाए जाएंगे। केंद्र सरकार राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की समीक्षा करने जा रही है। एएसआई की पहली सूची में दिल्ली, हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश के 18 लापता स्मारकों को शामिल किया गया है। इनका नाम एएसआई की राष्ट्रीय महत्व की सूची से हटाने से पहले बाकायदा आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी गई हैं। आम लोग दो महीने तक अपनी आपत्ति और सुझाव एएसआई को भेज सकते हैं।
एएसआई की 18 लापता स्मारकों की पहली सूची में सबसे अधिक नौ स्मारक उत्तर प्रदेश से हैं। इनमें मिर्जापुर जिले के अहुगी में एक हजार ईसवीं के तीन छोटे लिंग मंदिर परिधि के अवशेष, वाराणसी का तेलिया नाला बौद्ध खंडहर, निर्जन गांव का हिस्सा, वाराणसी के कोषागार भवन में तख्ती पट्ट (टेबलेट), लखनऊ के जहरीला रोड़ पर 6 और आठ मील पर कब्रिस्तान, लखनऊ-फैजाबाद रोड़ पर 3, 4 और 5 मील पर मकबरें, गौघाट का कब्रिस्तान, झांसी के रंगून का बंदूकची बुर्किल की कब्र, बांदा के दक्षिण-पश्चिम शहर का बंद कब्रिस्थान व कटरा नाका, गाजीपुर के भारंली गंगा तिर में वट वृक्ष स्थित प्राचीन स्मारक के अवशेष शामिल हैं। उत्तराखंड में अल्मोड़ा के द्वाराहाट का कुटुम्बरी क्षेत्र नालिस, तो राजस्थान के जयपुर जिले के नगर स्थित किले के शिलालेख व कोटा जिले का बारन स्थित 12वीं सदी के मंदिर का नाम भी शामिल है।
सीएजी रिपोर्ट से चला पता
सीएजी की 2013 की रिपोर्ट में 92 संरक्षित स्मारकों के लापता होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद संसद में भी कई बार सवाल उठे। संस्कृति मंत्रालय और एएसआई ने इन लापता स्मारकों को तलाशने का काम शुरू किया। लेकिन सिर्फ 68 को ही तलाश सके। अभी तक 24 स्मारक लापता हैं।
विशेषज्ञों ने सर्वेक्षण कर तैयार की रिपोर्ट
राष्ट्रीय स्मारक का अध्ययन करने वाली समिति के सदस्य संजीव सान्याल ने बताया कि एएसआई की सूची में राष्ट्रीय महत्व के 3695 पुरातात्विक व ऐतिहासिक स्मारक हैं। अंग्रेजों के समय से एएसआई की सूची में स्मारक जुड़ते रहे, लेकिन कई स्मारक आज भौतिक रूप से मौजूद ही नहीं हैं। एएसआई के विशेषज्ञों की टीम ने पहले बाकायदा सर्वेक्षण किया है।