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Missile Misfires: क्या मिसाइल परीक्षण को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच कोई समझौता है, कोई मिसाइल मिसफायर कैसे हो जाती है?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Sat, 12 Mar 2022 05:51 PM IST

सार

भारत ने स्वीकार किया है कि तकनीकी खराबी के कारण मिसाइल फायर हुई। यह जानना जरूरी है कि ऐसे परीक्षणों के लिए किस प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है? 
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Brahmos - फोटो : Social Media
पाकिस्तान ने गुरुवार को आरोप लगाया कि नौ मार्च को भारत की तरफ से एक सुपरसोनिक प्रोजेक्टाइल (फ्लाइंग ऑब्जेक्ट) फायर किया गया था, जो उसके क्षेत्र में 124 किमी अंदर उतरी। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसुफ ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर इस संवेदशनील घटना की जांच की मांग की है। पाकिस्तान के आरोप पर भारत ने अपना पक्ष साफ करते हुए इस घटना पर खेद जताया है।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि तकनीकी खराबी की वजह से मिसाइल फायर हो गई थी। भारत ने इस पर खेद जताया है और कहा है कि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मिसाइल हरियाणा के सिरसा से छोड़ी गई थी जो सूरतगढ़ के रास्ते पाकिस्तान की सीमा में शाम करीब 6.43 बजे 124 किलोमीटर अंदर जाकर गिरी।


राहत की बात यह भी है कि हादसे में किसी की जान नहीं गई है। हालांकि इस तरह मिसाइल परीक्षण का गलत हो जाना, सीमा पार पहुंच जाना और अनजाने में ट्रैक बदल लेना असाधारण बात है।
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Brahmos - फोटो : Social Media
पाकिस्तान ने गुरुवार को आरोप लगाया कि नौ मार्च को भारत की तरफ से एक सुपरसोनिक प्रोजेक्टाइल (फ्लाइंग ऑब्जेक्ट) फायर किया गया था, जो उसके क्षेत्र में 124 किमी अंदर उतरी। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसुफ ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर इस संवेदशनील घटना की जांच की मांग की है। पाकिस्तान के आरोप पर भारत ने अपना पक्ष साफ करते हुए इस घटना पर खेद जताया है।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि तकनीकी खराबी की वजह से मिसाइल फायर हो गई थी। भारत ने इस पर खेद जताया है और कहा है कि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मिसाइल हरियाणा के सिरसा से छोड़ी गई थी जो सूरतगढ़ के रास्ते पाकिस्तान की सीमा में शाम करीब 6.43 बजे 124 किलोमीटर अंदर जाकर गिरी।

राहत की बात यह भी है कि हादसे में किसी की जान नहीं गई है। हालांकि इस तरह मिसाइल परीक्षण का गलत हो जाना, सीमा पार पहुंच जाना और अनजाने में ट्रैक बदल लेना असाधारण बात है।

Brahmos missile - फोटो : ANI
पहले जानिए कि क्या भारत और पाकिस्तान को ऐसे परीक्षणों के बारे में पहले बताते हैं?
हां। 2005 में बैलिस्टिक मिसाइल समझौते के तहत उड़ान परीक्षण की सूचना दूसरे देश को देनी होती है। प्रत्येक देश को किसी भी भूमि या समुद्र में लॉन्च होने वाली और सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल के लिए उड़ान परीक्षण को लेकर पहले सूचना देनी होती है।

ऐसा करने वाले देश को दूसरे राष्ट्र को पांच दिन की लॉन्च विंडो के शुरू होने से कम से कम तीन दिन पहले सूचित करना होता है। परीक्षण की पूर्वसूचना विदेशी कार्यालयों और उच्चायोगों के माध्यम से दी जाती है।

परीक्षण से पहले  देश को विमान पायलटों और नाविकों को सचेत करने के लिए वायु मिशनों या नौवहन चेतावनी को नोटिस जारी किया जाता है। परीक्षण करने वाले देश को यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रक्षेपण स्थल 40 किमी के भीतर नहीं होना चाहिए और इसका प्रभाव क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय सीमा या नियंत्रण रेखा के 75 किमी के भीतर नहीं होना चाहिए। साथ ही प्रक्षेप पथ आईबी या एलओसी को पार नहीं करना चाहिए। 

पाकिस्तान का क्या कहना है?
पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक  मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने कहा कि इस परीक्षण से पहले भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के सैन्य अभियान के महानिदेशकों के बीच कोई संपर्क नहीं हुआ। परीक्षण पर  भारत की ओर से कुछ भी नहीं कहा गया।
 
उन्होंने यह भी बताया हालांकि दोनों देशों के बीच बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण पर जानकारी साझा करने संबंधी एक समझौता है,  लेकिन इस तरह की मिसाइलों के लिए हम जानकारी साझा नहीं करते हैं।

सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस - फोटो : Amar Ujala
यह कैसी मिसाइल थी?
भारत ने इस पर कुछ नहीं कहा है। मीडिया रिपोर्टस में कहा जा रहा है कि यह ब्रह्मोस लैंड-अटैक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल थी जो परंपरागत (गैर-परमाणु) हथियार है।

हालांकि पाकिस्तान ने इसे ‘सुपरसोनिक मिसाइल’ बताया है। पाकिस्तान का दावा है कि मिसाइल करीब 40,000 फीट की ऊंचाई पर आवाज से तीन गुना ज्यादा रफ्तार से उड़ते हुए उनके एयरस्पेस में 100 किलोमीटर से ज्यादा भीतर तक घुस आई।

मिसाइल मिसफायर कैसे हो सकती है? 
प्रमुख तौर पर इसकी एक दो-वजहें हो सकती हैं। एक क्रूज मिसाइल के परीक्षण से पहले उसमें लक्ष्य निर्देश दे दिया जाता है। उसके बाद जब जमीन से दागा जाता है तो वह अपने रास्ते पर निकल जाता है। कुछ मिसाइलें ऐसे भी हैं जिसमें उड़ान के बीच में लक्ष्य को लेकर अपडेट किया जा सकता है। 

आम तौर पर,  इस तरह की मिसाइल में एक फ्यूज होता है। यदि यह खराब हो जाता है उड़ान के दौरान इसे नष्ट किया जा सकता है। लेकिन यदि इसका संपर्क टूट गया है तो इसे नष्ट नहीं किया जा सकता है। 

क्या पहले भी ऐसी घटना हुई है?
2020 के सितंबर में रूस मास्को में चीन, पाकिस्तान और ईरान समेत दुनिया के 12 देशों के साथ मिलकर युद्धाभ्यास कर रहा था। सभी देश की सेना अपने शक्ति का प्रदर्शन कर रही थी। इसी दौरान रूस ने अपने S 400 मिसाइल का परीक्षण किया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में यह दावा किया गया कि दो मिसाइलों का तो ठीक से परीक्षण हो गया लेकिन एक मिसाइल अपने कैनन से निकलने के बाद मिसफायर हो कर जमीन पर गिर गई।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2021 में पाकिस्तान में शाहीन-3 मिसाइल परीक्षण के दौरान भी मिसफायर की घटना हुई थी, जो  डेरा बुगती के मट क्षेत्र में आकर गिरी और जिसमें कई लोगों के घायल होने की खबर आई थी। हालांकि पाकिस्तानी सेना के ऑफिशियल ट्विटर एकाउंट आईएसपीआर से 20 जनवरी को ट्वीट कर यह दावा किया गया कि सतह से सतह पर मार करने वाली 2750 किलोमीटर रेंज की शाहीन-3  मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।
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