मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पहले उर्दू एजुकेशन बोर्ड को निजी बोर्ड के रूप में मान्यता दे दी, फिर गलती का पता चलने पर उसकी मान्यता रद्द कर दी। दरअसल निजी बोर्ड को मान्यता देने की सरकार की कोई नीति ही नहीं है। इस मामले में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को गुमराह करने के चलते सरकार ने अपने वरिष्ठ अधिकारी को दो महीने पहले सस्पेंड कर दिया था, जबकि कई अधिकारी जांच के दायरे में हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय का अधिकारी सस्पेंड, अन्य जांच के घेरे में
अमर उजाला के पास इस मामले से जुड़े दस्तावेज हैं, जिसके मुताबिक एनसीपी के सांसद तारिक अनवर ने
प्रकाश जावड़ेकर को पिछले साल पत्र लिख कर कहा था कि उर्दू एजुकेशन बोर्ड के छात्रों को अन्य कॉलेज या संस्थान दाखिला नहीं देते हैं। छात्रों की दिक्कत का हवाला देते हुए इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया था।
उसके बाद डिप्टी एजुकेशन एडवाइजर डीके भावसर के नाम से अधिसूचना जारी कर उर्दू एजुकेशन बोर्ड के छात्रों को आगे दाखिला देने का दिशा-निर्देश दिया गया था। इस पत्र के आधार उर्दू एजुकेशन बोर्ड ने अपनी वेबसाइट पर दाखिला विंडो ओपन कर दी। कुछ संगठनों ने इस दाखिला विंडो की जानकारी जब केंद्र से मांगी, तब सामने आया कि उक्त संस्थान को गलती से मान्यता दे दी गई। इसके बाद सरकार ने तुरंत डीके भावसर को सस्पेंड कर दिया।
मामले की जानकारी तक नहीं, झूठा फंसाया गया
निलंबित अधिकारी के भावसर के कहा है कि उर्दू एजुकेशन बोर्ड मामले की मुझे कोई जानकारी नहीं है। मंत्रालय ने मुझे गलत मामले में फंसाया है। मेरे पास अपनी बात रखने के कोई कागजात नही हैं, क्योंकि सरकार ने सभी दस्तावेज सील कर दिए और मुझे सस्पेंड करने का निर्देश दे दिया। मैं इस मामले में अब अदालत में अपना पक्ष रखूंगा।
उर्दू एजुकेशन बोर्ड के निदेशक, नुसरत जफर ने कहा है कि मंत्रालय पहले अधिसूचना जारी करता है और उसके बाद आदेश को वापस लेता है। मंत्रालय के पास निजी बोर्ड को लेकर कोई नीति नहीं है, फिर कैसे मंजूरी दी गई। इसका कोई जवाब नहीं है।