लंबा समय जेल में गुजार चुकी विचाराधीन महिला कैदियों को जमानत दिए जाने की सिफारिश की गई है। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने उन विचाराधीन महिलाओं को जमानत देने की अनुशंसा की है जो लंबा समय जेल में गुजार चुकी हैं। यह सिफारिश “ वीमेन इन प्रिजन्स ’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में की गई है।
मंत्रालय ने ऐसी विचाराधीन महिला कैदियों को जमानत देने की सिफारिश की है जो उन्हें मिलने वाली अधिकतम सजा का एक तिहाई हिस्सा हिरासत में बिता चुकी हैं। जेल में महिलाओं द्वारा सामना किए जाने वाले कई मुद्दों को उठाया गया है। साथ ही इसमें विकलांग महिलाओं और बुजुर्गों की जरूरतों पर भी बात की गई है।
इस रिपोर्ट में सीआरपीसी की धारा 463 ए में कुछ जरूरी बदलाव करने के सुझाव दिए गए हैं जिसमें आधी सजा काट लेने के बाद रिहाई का प्रावधान है। मंत्रालय ने कुछ आंकड़े भी शेयर किए हैं। जिसमें सबसे ताजा डाटा 2015 का है जिसमें बताया गया है कि भारतीय जेलों में 4, 19,623 लोग जेल में हैं जिसमें 17,834 यानी लगभग 4.3 फीसदी मिलाएं हैं। जिसमें करीब 11,916 (66.8फीसदी) महिला विचाराधीन कैदी हैं। भारतीय जेलों के पांच सालों में किए जाने वाले विश्लेषण में कहा गया है कि महिला कैदियों की संख्या में तेजी से बढ़ रही है। 2000 में जहां महज 3.3 फीसदी थीं वह 2015 में 4.3 फीसदी हो गई हैं।