भारत ने चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'वन बेल्ट, वन रोड' (ओबीओआर) पर अपनी नाराजगी व्यक्त कर दी है। भारत ने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर मुख्य चिंताओं को अनदेखा करता हो।
बता दें ओबीओर फोरम 14 मई से 16 मई तक बीजिंग में आयोजित होगा। इसमें 29 देश शामिल हो रहे हैं। भारत के अलावा इस फोरम में शामिल होने वाले देशों में सारे दक्षिण एशियाई देशों का नाम शामिल है। भारत इस फोरम के लिए अपना कोई भी प्रतिनिधि नहीं भेजेगा।
विदेश मामलों के मंत्रालय (विदेश मंत्रालय) के आधिकारिक प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा, हम ऐसा विश्वास रखते हैं कि कनेक्टिविटी पहल सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय मानदंड, सुशासन, कानून का नियम, खुलेपन, पारदर्शिता और समानता पर आधारित होना चाहिए।
उन्होंने कहा, "कनेक्टिविटी परियोजनाओं को ऐसे तरीके से अपनाया जाना चाहिए जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान कर सके।"बागले ने कहा कि भारत उसकी कनेक्टिविटी पहल पर एक सार्थक बातचीत करने के लिए चीन को आग्रह कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि "हम चीनी पक्ष से सकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
बलूच नेता भी ओबीओआर का लगातार कर रहे विरोध
बलूच नेता अशरफ शेरजन
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गौरतलब है भारत ओबीओआर पहल के तहत चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के शामिल किए जाने के विरोध में है। परियोजना का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के माध्यम से गुजरता है।
51 अरब अमेरिकी डॉलर का सीपीईसी परियोजना पूरे पाकिस्तान में निर्माणाधीन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का एक संग्रह है। कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों में की जाएंगी, जिनमें गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र भी शामिल है, जो कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आता है।
बता दें कि भारत के अलावा बलूच नेता भी लगातार इसका विरोध करते रहे हैं। बलूच रिपब्लिकन पार्टी के नेता अशरफ शेरजन ने कहा कि ओबीआर से जुड़ने वाले देशों से मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि कोई भी कदम उठाने से पहले वो बलूचिस्तान की स्थिति को ध्यान में रख लें।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन के हित के बीच, इस प्रोजेक्ट से बलूचिस्तान के लोगों के लिए कोई फायदा नहीं है। बलूचिस्तान के लोग पहले ही सीपीईसी को खारिज कर चुके हैं।
चीन के ओबीओआर प्रोजेक्ट में शामिल होने वाले नेपाल ने दी सफाई
दीप कुमार उपाध्याय
वहीं दूसरी ओर इस प्रोजेक्ट में शामिल होने वाले नेपाल ने अपनी सफाई दी है। भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि नेपाल भारत को कभी भी चोट नहीं पहुंचाएगा। ओबीओआर पर भारत की आपत्ति चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी सीपीईसी से है।
उन्होंने कहा कि नेपाल चीन जैसी आर्थिक महाशक्ति को भी अनदेखा नहीं कर सकता। नेपाल को विदेशी निवेश की जरूरत है जिससे वो विकास कर सके।
उन्होंने आगे कहा कि नेपाल को आर्थिक विकास करने के लिए उत्तर के पड़ोसी देशों से संबंध बेहतर बनाना जरूरी है। श्रीलंका जैसे देश भी इस प्रोजेक्ट में चीन का समर्थन कर रहे हैं।