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संसद में राहुल गांधी ने पूछे ऐसे सवाल कि सरकार को जवाब देने के लिए 'खंगालना' पड़ा 1885 का ये खास एक्ट!

Tue, 22 Sep 2020 05:59 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर सरकार ने सूचित किया है कि पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में संसद द्वारा अगस्त 2019 में किए गए संवैधानिक परिवर्तनों के मद्देनजर, लोक व्यवस्था को कायम रखने के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय किए गए थे। इनमें कुछ लोगों के निवारक निरुद्धता भी शामिल थी। 11 सितंबर तक 223 व्यक्ति निरुद्ध यानी डिटेन किए गए हैं...
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Parliament - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष एवं मौजूदा लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने सदन में छह प्वाइंट वाला एक सवाल पूछा। उसमें तीनों कालों का जिक्र था। यानी वह सवाल भूत, वर्तमान और भविष्य को अपने में समेट हुए था। राहुल के सवाल बड़े सीधे थे, तो वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी उनके हर सवाल का जवाब सीधे तरीके से ही दिया। हालांकि रेड्डी को उत्तर देते समय 1885 के दूरसंचार और इंटरनेट सेवाएं भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम की मदद लेनी पड़ी। राहुल के सारे सवाल जम्मू-कश्मीर से जुड़े थे।

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दरअसल, राहुल गांधी ने बीस सितंबर को लोकसभा में पूछा कि जम्मू और कश्मीर में सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पांच अगस्त 2019 तक निरुद्ध किए गए राजनीतिक नेताओं का ब्यौरा क्या है। उनकी निरुद्धता की अवधि कितनी है। दूसरा, निरुद्ध किए गए कितने लोग अब भी रिहा नहीं हुए हैं। तीसरा, क्या सरकार का जम्मू-कश्मीर में 4जी सेवाओं को बहाल करने का विचार है। चौथा, यदि हां तो 4जी सेवाओं को बहाल करने के लिए क्या समय-सीमा तय की गई है। पांचवां, क्या सरकार ने कोविड-19 वैश्चिक महामारी के दौरान जम्मू और कश्मीर में आवश्यक सेवाओं और ऑनलाइन शिक्षा पर 4जी सेवाओं के प्रतिबंध के प्रभाव की जांच की है। छठा, यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है।

गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर सरकार ने सूचित किया है कि पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में संसद द्वारा अगस्त 2019 में किए गए संवैधानिक परिवर्तनों के मद्देनजर, लोक व्यवस्था को कायम रखने के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय किए गए थे। इनमें कुछ लोगों के निवारक निरुद्धता भी शामिल थी। 11 सितंबर तक 223 व्यक्ति निरुद्ध यानी डिटेन किए गए हैं।
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तीसरे और चौथे सवाल का जवाब देते हुए रेड्डी ने कहा, दूरसंचार और इंटरनेट सेवाएं भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 व दूरसंचार सेवाओं का अस्थायी निलंबन (सार्वजनिक आपात स्थिति अथवा लोक सुरक्षा) नियमावली, 2017 के अंतर्गत विनियमित की जाती है। ये प्रतिबंध भारत की संप्रभुता एवं अखंडता और राज्य की सुरक्षा के हित में तथा लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए जाते हैं, जैसा कि भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1985 की धारा 5 (2) के अंतर्गत प्रावधान किए गए हैं।

कश्मीर में 24 जनवरी 2020 से फिक्स्ड लाइन (स्पीड संबंधी किसी प्रतिबंध के बगैर) के साथ-साथ मोबाइल डाटा सेवाओं (2जी स्पीड) पर इंटरनेट सेवाएं पहले से ही उपलब्ध हैं। सोशल मीडिया साइट पर एक्सेस करने से संबंधित प्रतिबंध भी चार मार्च से हटा लिए गए थे। इसके अतिरिक्त 16 अगस्त से गांदरबल और उधमपुर जिलों में हाई स्पीड मोबाइल डाटा सेवाएं भी चालू कर दी गई हैं। कानून के अनुसार, भारत के उच्चतम न्यायालय के निर्णय में निर्धारित किए गए सिद्धांतों और उनमें निहित निर्देशों के पूर्ण रूप से अनुपालन करते हुए यथोचित मूल्यांकन करने के बाद समय-समय पर जारी आदेशों के तहत इंटरनेट का रेग्युलेशन सीमित अवधि के लिए किया गया है।

अंतिम दो सवालों के जवाब में रेड्डी ने कहा, सभी प्रकार के व्यवसायों को फिक्स्ड लाइन कनेक्टिविटी के माध्यम से स्पीड में किसी प्रकार के प्रतिबंध के बगैर इंटरनेट की उपलब्धता प्रदान की गई है। इससे पहले, पूरी घाटी में बहुत सारे इंटरनेट क्योस्क खोले गए थे। इसके बावजूद वैश्चिक महामारी की वजह से आर्थिक गतिविधियों पर कुछ हद तक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। 2जी मोबाइल इंटरनेट स्पीड से आम जनता के साथ साथ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जानकारी का आदान प्रदान करने और कोविड नियंत्रण उपायों को करने में कोई बाधा नहीं पहुंची है।

इसके अलावा ई-बुक्स व अन्य अध्ययन सामग्री डाउनलोड करने के लिए सरकार की ई-लर्निंग एप और शिक्षा ई-लर्निंग वेबसाइटें 2जी इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। हाई स्पीड मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर लगाया गया प्रतिबंध न्याय के प्रशासन में किसी प्रकार की बाधा नहीं रहा है। न्यायालयों द्वारा वैश्विक महामारी के दौरान वकीलों और वादियों को वीडियो लिंक्स, यूआरएल मुहैया कराकर अपनी कार्यवाहियों का संचालन करने के लिए विशेष उपाय किए गए हैं।

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