नौसेना और वायु सेना के मेजर जनरलों और समकक्ष रैंक के अधिकारियों को नौसेना और वायु सेना के ब्रिगेडियर और समकक्ष रैंक के अधिकारियों की तुलना में कम वेतन और पेंशन देने के मुद्दे से जुड़े कई अधिकारियों द्वारा 10 याचिकाएं दायर की गई थीं।
एक सैन्य अदालत ने सेना में ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारियों की तुलना में कम वेतन और पेंशन लेने के खिलाफ रक्षा बलों के मेजर जनरल-रैंक के अधिकारियों की याचिका मंगलवार को स्वीकार कर ली। ऐसे 10 प्रभावित अधिकारियों के एक वकील ने यह जानकारी दी।
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नौसेना और वायु सेना के मेजर जनरलों और समकक्ष रैंक के अधिकारियों को नौसेना और वायु सेना के ब्रिगेडियर और समकक्ष रैंक के अधिकारियों की तुलना में कम वेतन और पेंशन देने के मुद्दे से जुड़े कई अधिकारियों द्वारा 10 याचिकाएं दायर की गई थीं।
मेजर जनरल तीनों बलों में ब्रिगेडियर से ऊपर का पद है और उन्हें अपने कनिष्ठों की तुलना में कम वेतन और पेंशन मिलने की विसंगति पिछले कुछ समय से लंबित है। याचिकाकर्ताओं के वकील कर्नल इंद्रसेन सिंह (सेवानिवृत्त) ने बताया कि याचिका पर आज अंतत: सुनवाई हुई और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (प्रधान पीठ) ने आज एक साझा आदेश के जरिए इसे स्वीकार कर लिया।
कर्नल सिंह ने बताया कि न्यायाधिकरण ने पाया कि मेजर जनरल और समकक्ष रैंक के अधिकारियों और नौसेना व वायु सेना के ब्रिगेडियर और समकक्ष रैंक के अधिकारियों के बीच वेतन/पेंशन असमानता का मुद्दा 2019 से सरकार के पास लंबित है, लेकिन इसका समाधान नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, आज सरकार ने इस मामले में अंतिम निर्णय लेने की लिए और समय मांगा। सिंह ने कहा कि हालांकि न्यायाधिकरण ने और समय देने से इनकार कर दिया और सरकार को निर्देश देने वाली याचिकाओं को स्वीकार कर लिया कि याचिकाकर्ताओं का वेतन बढ़ाकर उन्हें उनके कनिष्ठों के बराबर लाया जाए और उसके बाद वेतन, पेंशन और अन्य लाभों के सभी बकाया राशि दी जाए।