फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Military Court: मेजर जनरल रैंक के अफसरों को मिल रही ब्रिगेडियर से कम पेंशन, सैन्य अदालत ने स्वीकार की याचिका

Tue, 14 Mar 2023 10:55 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नौसेना और वायु सेना के मेजर जनरलों और समकक्ष रैंक के अधिकारियों को नौसेना और वायु सेना के ब्रिगेडियर और समकक्ष रैंक के अधिकारियों की तुलना में कम वेतन और पेंशन देने के मुद्दे से जुड़े कई अधिकारियों द्वारा 10 याचिकाएं दायर की गई थीं।
विज्ञापन
Armed Forces Tribunal - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एक सैन्य अदालत ने सेना में ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारियों की तुलना में कम वेतन और पेंशन लेने के खिलाफ रक्षा बलों के मेजर जनरल-रैंक के अधिकारियों की याचिका मंगलवार को स्वीकार कर ली। ऐसे 10 प्रभावित अधिकारियों के एक वकील ने यह जानकारी दी।

विज्ञापन


नौसेना और वायु सेना के मेजर जनरलों और समकक्ष रैंक के अधिकारियों को नौसेना और वायु सेना के ब्रिगेडियर और समकक्ष रैंक के अधिकारियों की तुलना में कम वेतन और पेंशन देने के मुद्दे से जुड़े कई अधिकारियों द्वारा 10 याचिकाएं दायर की गई थीं।

मेजर जनरल तीनों बलों में ब्रिगेडियर से ऊपर का पद है और उन्हें अपने कनिष्ठों की तुलना में कम वेतन और पेंशन मिलने की विसंगति पिछले कुछ समय से लंबित है। याचिकाकर्ताओं के वकील कर्नल इंद्रसेन सिंह (सेवानिवृत्त) ने बताया कि याचिका पर आज अंतत: सुनवाई हुई और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (प्रधान पीठ) ने आज एक साझा आदेश के जरिए इसे स्वीकार कर लिया।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: प्रशासनिक परिषद की बैठक: अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों के परिवारों को अब मिलेंगे 25 लाख

कर्नल सिंह ने बताया कि न्यायाधिकरण ने पाया कि मेजर जनरल और समकक्ष रैंक के अधिकारियों और नौसेना व वायु सेना के ब्रिगेडियर और समकक्ष रैंक के अधिकारियों के बीच वेतन/पेंशन असमानता का मुद्दा 2019 से सरकार के पास लंबित है, लेकिन इसका समाधान नहीं किया गया है। 
विज्ञापन


उन्होंने कहा, आज सरकार ने इस मामले में अंतिम निर्णय लेने की लिए और समय मांगा। सिंह ने कहा कि हालांकि न्यायाधिकरण ने और समय देने से इनकार कर दिया और सरकार को निर्देश देने वाली याचिकाओं को स्वीकार कर लिया कि याचिकाकर्ताओं का वेतन बढ़ाकर उन्हें उनके कनिष्ठों के बराबर लाया जाए और उसके बाद वेतन, पेंशन और अन्य लाभों के सभी बकाया राशि दी जाए।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें