इस बार यदि वेलेंटाइन डे पर आप प्यार की गर्माहट महसूस करें तो इसके लिए अपने जीन या भाग्य को धन्यवाद कहने के बजाय अपने शरीर के भीतर माइक्रोब्स (सूक्ष्मजीवियों) का शुक्रिया अदा करें। दुनिया के बड़े तकनीकी संस्थान एमआईटी के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि हाल के वर्षों में हमारे शरीर के भीतर ये सूक्ष्मजीवी बहुत तेजी से बढ़े हैं। ये इंसान की सेहत और मूड के लिए बहुत अच्छे भी होते हैं।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) की माइक्रोबायोलॉजिस्ट स्यूजन एर्डमेन ने इन माइक्रोब्स को ‘सेहत की चमक’ बताया है। उन्होंने बताया कि शरीर में पनाह पाने वाले ये सूक्ष्मजीवी हमारी चमड़ी को और भी खूबसूरत और बालों को चमकीला बनाते हैं। हमारी आंतों में बसने वाले ये माइक्रोब्स हमारी सेहत को कई तरह से अच्छा रखते हैं। इनमें एलर्जी संबंधी संवेदनशीलता, हमारा वजन, संक्रमण का अंदेशा और मूड या मिजाज भी शामिल होता है। इसके अलावा यह हमें कामुक (सैक्सी) भी बनाता है।
स्यूजन एर्डमेन ने बताया कि कुछ वर्ष पहले उन्होंने मानवीय ब्रेस्ट मिल्क से अलग किए गए प्रोबायोटिक माइक्रोब को चूहों में प्रवेश कराने की संभावना तलाशी थी। तब प्रयोगशाला में उनके तकनीशियन ने पाया कि इन जानवरों में चमकदार रोएं आने लगे हैं।
आगे देखा गया कि पुरुष चूहों में टेस्टोस्टेरॉन स्तर बढ़ने लगा और उनके टेस्टिकल (अंडकोषों) का आकार बढ़ गया। साथ ही उनकी चमड़ी कोमल होने लगी और रस का स्राव बढ़ गया। जबकि चुहियों में भी कई बदलाव देखे गए। उनमें सफल गर्भधारण और ज्वलनशीलता को रोकने में मदद करने वाले इंटरल्युकिन-10 नामक प्रोटीन का स्तर बढ़ने लगा। इससे ऑक्सीटोसिन हार्मोन भी बढ़ गया जो प्यार बढ़ाने वाला माना जाता है।