नक्सली संगठन खूनखराबा करने के लिए ‘ज्यादा खतरनाक’ आईईडी विस्फोटकों और अन्य तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं और यही कारण है कि पिछले वर्ष अधिक संख्या में सुरक्षा बलों के जवान तथा आम नागरिक मारे गए।
एनएसजी के नेशनल बम डेटा सेंटर (एनबीडीसी) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 के मुकाबले 2016 में आईईडी विस्फोट की घटनाओं में 26 फीसदी की वृद्धि हुई और हताहत लोगों की संख्या में भी तीन फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई।
देश में गत वर्ष विस्फोटों में 112 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से 73 मौतें नक्सल प्रभावित इलाकों में, 14 मौतें पूर्वोत्तर के उग्रवाद से ग्रस्त इलाकों में, पांच जम्मू-कश्मीर में और 20 मौतें देश के शेष हिस्सों में हुई। गत सप्ताह प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर मौतें उच्च तीव्रता के आईईडी विस्फोटों से हुईं।