केंद्र सरकार अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स के उन कर्मियों को जो कांस्टेबल से सब-इंस्पेक्टर के पद तक हैं, सेवानिवृत्ति के दिन एक रैंक ऊपर का मानद पद सौंपेगी। इस फैसले का मकसद सेवानिवृत्त होने वाले जवानों को सम्मानपूर्वक विदाई देना है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स के उन कर्मियों को जो कांस्टेबल से सब-इंस्पेक्टर के पद तक हैं, सेवानिवृत्ति के दिन एक रैंक ऊपर का मानद पद दिया जाएगा। यह फैसला उन जवानों के आत्म-सम्मान, गौरव और मनोबल को बढ़ाने के लिए लिया गया है जो वर्षों तक देश की सेवा कर सेवानिवृत्त होते हैं। हालांकि, इस मानद रैंक के साथ कोई आर्थिक या पेंशन लाभ नहीं मिलेगा।
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क्या है ये योजना?
गृह मंत्रालय ने बताया कि यह योजना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व में लागू की गई है। इसका उद्देश्य सेवानिवृत्त होने वाले जवानों को सम्मानपूर्वक विदाई देना है।
किसे मिलेगा एक रैंक ऊपर का दर्जा?
इस योजना के तहत कई बदलाव किए जाएंगे। यह सिर्फ सम्मान के रूप में दिया गया रैंक होगा। इसका उपयोग रिटायरमेंट पार्टी, प्रमाणपत्रों और सरकारी दस्तावेजों में किया जा सकेगा, लेकिन इससे किसी भी प्रकार का वेतन या पेंशन लाभ नहीं मिलेगा।
कांस्टेबल को सेवानिवृत्ति के दिन हेड कांस्टेबल का मानद रैंक मिलेगा
हेड कांस्टेबल को असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI)
ASI को सब-इंस्पेक्टर (SI)
SI को इंस्पेक्टर
राइफलमैन को हवलदार
हवलदार को वॉरंट ऑफिसर का मानद रैंक मिलेगा
इसके लिए कौन-कौन होगा पात्र?
मानद रैंक पाने के लिए कुछ शर्तें होंगी। जिसमें प्रमोशन के लिए सभी योग्यताएं पूरी करनी होंगी, इसके साथ सेवा रिकॉर्ड अच्छा और साफ-सुथरा होना चाहिए। वहीं पिछले पांच वर्षों का सालाना मूल्यांकन रिपोर्ट कम से कम 'अच्छा' होना चाहिए, जबकि पिछले पांच सालों में कोई बड़ा अनुशासनात्मक दंड नहीं मिला हो और कर्मचारी की ईमानदारी पर कोई सवाल न हो।
इस पहल का क्या है उद्देश्य?
गृह मंत्रालय के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य देश की सेवा में वर्षों तक जुटे रहे जवानों को उनके अंतिम दिन पर सम्मान और गर्व का अनुभव कराना है। यह कदम उनके मनोबल और आत्म-सम्मान को बढ़ाएगा। यह फैसला सीएपीएफ (जैसे बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी) और असम राइफल्स के उन हजारों जवानों को नई पहचान देगा, जिन्होंने सीमाओं की सुरक्षा और देश की आंतरिक सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई है।