केंद्रीय गृह मंत्रालय नागरिकता संशोधन विधेयक के कानून बन जाने के दो साल बाद भी इसे लेकर अब तक नियम तय नहीं बना पाया है। अब एक बार फिर गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले इस मंत्रालय ने सीएए के नियमों को तैयार करने के लिए संसदीय समितियों से समय मांगा है।
नागरिकता संशोधन कानून 11 दिसंबर 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था। इसे अगले ही दिन राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद गृह मंत्रालय ने इसे अधिसूचित किया था। हालांकि, कानून अभी लागू होना बाकी है क्योंकि सीएए के तहत नियम बनाए जाने अभी बाकी हैं।
गौरतलब है कि सीएए के जरिए केंद्र सरकार बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देना चाहती है। हालांकि, इसके अधिसूचित होने के बाद से नियम बनाने के लिए अब तक पांच बार समय बढ़ाने की मांग की जा चुकी है।
सीएए के नियम न बन पाने के पीछे क्या वजह?
संसदीय कार्य संबंधी नियमावली के मुताबिक, राष्ट्रपति की सहमति के छह महीने के अंदर ही किसी भी कानून के लिए नियम तैयार कर लिए जाने चाहिए। या फिर लोकसभा और राज्यसभा के अंतर्गत आने वाली संसदीय समितियों से विस्तार का अनुरोध किया जाना चाहिए। हालांकि, गृह मंत्रालय सीएए कानून बनने के छह महीने के अंदर नियम नहीं बना सका। इसलिए उसने पहली बार जून 2020 में और फिर चार बार समितियों से नियम बनाने के लिए और समय मांगा। पांचवां विस्तार सोमवार को समाप्त हो गया है।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने और समय के अनुरोध के लिए संसदीय समितियों से संपर्क किया है। उम्मीद है कि हमें सेवा विस्तार मिल जाएगा।’’ केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि सीएए के पात्र लाभार्थियों को भारतीय नागरिकता इस कानून के तहत नियम अधिसूचित होने के बाद ही दी जाएगी।
सीएए के जरिए मोदी सरकार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदुओं, सिखों, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई जैसे प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना चाहती है। कानून के तहत इन समुदायों के जो लोग 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए थे और जो वहां धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे थे, उन्हें अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी।
इससे पहले संसद में सीएए पारित होने के बाद, देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे जिसमें पुलिस गोलीबारी और संबंधित हिंसा में लगभग 100 व्यक्तियों की मौत हो गई।