गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार भारत-चीन सीमा पर आईटीबीपी ने 2020 के बाद 29 नईं बॉर्डर चौकियां बनाई हैं। अब कुल पोस्ट की संख्या 209 हो गई है। गलवां घटना के बाद निगरानी और पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है। सरकार ने बॉर्डर मैनेजमेंट विभाग बनाकर सड़क, बाड़ और तकनीकी सिस्टम को भी मजबूत किया है। इससे सीमा सुरक्षा और कड़ी हुई है।
भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 के बाद से अब तक भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने चीन सीमा पर 29 नई बॉर्डर आउट चौकियां बनाई हैं। ये कदम गलवां घाटी की घटना के बाद सीमा सुरक्षा को और सख्त करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि सीमा पर हर गतिविधि पर नजर रखने और तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए यह विस्तार जरूरी था।
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क्या नए आईटीबीपी चौकियां कहां-कहां बनाई गई?
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार ये 29 नई चौकियां लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक अलग-अलग सेक्टर में बनाए गए हैं। इनकी ऊंचाई 9 हजार फीट से लेकर 18,750 फीट तक है, जहां हालात बेहद कठिन होते हैं। अब आईटीबीपी की कुल 209 बॉर्डर आउट चौकियां हो गई हैं, जबकि 2020-21 में इनकी संख्या 180 थी। इसका मतलब है कि भारत ने सीमाई निगरानी को काफी मजबूत किया है, ताकि किसी भी घुसपैठ या गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
क्या गलवां के बाद बढ़ी निगरानी और पेट्रोलिंग?
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024 के अप्रैल से दिसंबर के बीच आईटीबीपी ने 4,503 बार पेट्रोलिंग की है। यह दिखाता है कि सीमा पर लगातार नजर रखी जा रही है। 2020 में गलवां घाटी में भारत और चीन के बीच हुए टकराव के बाद सुरक्षा एजेंसियां ज्यादा सतर्क हो गई हैं। आईटीबीपी को खास तौर पर हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी तरह की गतिविधि को तुरंत रोका जा सके और सीमा की सुरक्षा मजबूत बनी रहे।
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सीमा प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए?
गृह मंत्रालय ने जनवरी 2024 में बॉर्डर मैनेजमेंट विभाग बनाया है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रहा है। इसके तहत सड़क, बाड़, लाइटिंग और नई चौकियां बनाई जा रही हैं। भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर भी सैकड़ों नई चौकियां बनाई जा रही हैं। साथ ही सीआईबीएमएस जैसी तकनीक लागू की जा रही है, जिससे सेंसर और निगरानी सिस्टम के जरिए रियल टाइम जानकारी मिल सके। कुल मिलाकर सरकार सीमा सुरक्षा को तकनीक और संसाधनों के जरिए और मजबूत कर रही है।