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India Against Terrorism: एक दशक में तिहाई हुए आतंकी हमले; कश्मीर घाटी में अब भी बदलाव का इंतजार, आत्मसमर्पण कम

Mon, 05 May 2025 04:11 AM IST
शुभम कुमार परीक्षित निर्भय

सार

पिछले 10 वर्षों में भारत में आतंकी घटनाएं घटकर एक तिहाई रह गई हैं। देशभर में गिरावट आई, लेकिन कश्मीर में अभी भी चुनौती बनी हुई है। 2000 से 2024 तक कुल 72,427 हमलों में से हर तीसरा हमला जम्मू-कश्मीर में हुआ, जहां 4,981 नागरिक और 3,624 जवान बलिदान हुए हैं।

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आतंकवादी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
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विस्तार
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आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति, पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था, मुस्तैद सुरक्षा एजेंसियों की बदौलत कुछ वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई काफी हद तक बदली है। यही कारण है कि 10 साल में आतंकी वारदातें घटकर करीब एक तिहाई रह गई हैं। बीते दशक में 2,242 आतंकी वारदातें हुईं, जबकि वर्ष 2004 से 2014 के बीच इनकी संख्या सात हजार से ज्यादा थी। आंकड़ों के अनुसार बीते दशक में आतंकी हमलों में हर साल गिरावट आई और संख्या सालाना 3,156 से घटकर 1,586 तक आ पहुंची है। हालांकि कश्मीर घाटी में समान रुझान नहीं है। वहां अब भी ऐसे बदलाव का इंतजार है।
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मामले में नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फॉर कनफ्लिक्ट मैनेजमेंट के दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल (एसएटीपी) के मुताबिक, साल 2000 से 2024 के बीच 72,427 आतंकी हमले हुए। इनमें 14,516 नागरिक, 7,579 जवानों की जान गई, जबकि 24,512 आतंकी भी मारे गए। बीते 10 साल में भारत ने आतंकियों पर लगाम कसने में बड़ी सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय स्तर पर आतंकी वारदातों का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है। हालांकि जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में आतंकी घटनाओं की संख्या कभी कम तो कभी बढ़ती नजर आती है।  

हर तीसरा हमला कश्मीर में
दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल (एसएटीपी) के अनुसार, 2000 से 2024 के बीच भारत में हर तीसरा आतंकी हमला कश्मीर घाटी में हुआ। 72,427 में से 22,143 आतंकी हमले जम्मू-कश्मीर में हुए हैं, जिनमें 4,981 आम नागरिकों की मौत हुई है। साथ ही आतंकियों से लड़ते हुए 3,624 सुरक्षा जवान बलिदान हुए। एक आंकड़ा यह भी है कि 2000 से 2024 के बीच भारत के सुरक्षा जवानों ने 24,512 आतंकियों को मार गिराया। इसमें औसतन हर दूसरा आंतकी कश्मीर घाटी में मारा गया।
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कश्मीर घाटी में करना पड़ रहा संघर्ष
साल 2014 में घाटी में 240 आतंकी हमले हुए, जो 2022 में बढ़कर 457 तक पहुंच गए। 2023 और 2024 में फिर गिरावट दर्ज की गई और इनकी संख्या घटकर क्रमश: 267 और 210 रह गई। इस पूरे क्षेत्र में यह उतार-चढ़ाव बीते 24 साल से जारी है। जाहिर है कश्मीर घाटी अभी ऐसा क्षेत्र बना हुआ है जहां आतंकवाद के समूल नाश के लिए सुरक्षा एजेंसियों को संघर्ष करना पड़ रहा है।  

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि पूरे देश में साल 2004 से 2014 के बीच 7,217 आतंकी वारदातें हुईं, जबकि 2014 से 2024 के बीच संख्या घटकर 2,242 रह गई। इस दौरान आतंकी हमलों में जनहानि में भी 70% तक कमी आई। इसके अनुसार, आम नागरिकों की मौतों की संख्या में 81% और सुरक्षाकर्मियों की मौतों में 50% की कमी दर्ज की गई है। 

आतंकियों के आत्मसमर्पण करने में भी आई कमी
जम्मू कश्मीर में 2000 से 2024 के बीच 847 आतंकियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें से अधिकांश आतंकियों ने मुठभेड़ के समय माता-पिता और अन्य परिजनों की अपील पर हथियार सौंपा। 2011 के बाद आत्मसमर्पण में गिरावट आई है। आखिरी बार जुलाई 2022 में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में दो आतंकियों ने आत्मसमर्पण किया जिनका संबंध लश्कर-ए-ताइबा से था। आईसीएम विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकी संगठन अब स्थानीय समर्थन से बाहर हो रहे हैं। इसके चलते आत्मसमर्पण में कमी आ रही है।
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थम गई पत्थरबाजी
कश्मीर घाटी में बड़ा बदलाव पत्थरबाजी की घटनाओं को लेकर दिख रहा है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि 2010 से 2014 तक औसतन 2,654 संगठित पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं, लेकिन 2024 में ऐसी एक भी घटना नहीं हुई। 132 संगठित हमले हुए, लेकिन अब एक भी नहीं है। इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट (आईसीएम) का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों का संघर्ष इसलिए भी बढ़ गया है कि आतंकी अब छिटपुट हमलों की बजाय बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं।

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