फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: कोर्ट ने कहा- महज वाहन चोरी की सूचना देने में देरी पर बीमा कंपनी किसी दावे को अस्वीकार नहीं कर सकती

Fri, 11 Feb 2022 08:04 PM IST
अभिषेक दीक्षित राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मौजूदा मामले में बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा देने से पल्ला झाड़ लिया था कि इसमें पॉलिसी की शर्त नंबर-एक का उल्लंघन गया था। इस शर्त के अनुसार  बीमाकर्ता को आकस्मिक नुकसान या क्षति के लिए तत्काल नोटिस देना होता है। लेकिन उसने पांच महीने के बाद चोरी के बारे में बीमा कंपनी सूचित किया था।
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि बीमा कंपनी सिर्फ इस आधार पर दावे को खारिज नहीं कर सकती है कि वाहन की चोरी के बारे में उसे सूचित करने में देरी हुई थी।

विज्ञापन


जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने यह कहते राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के एक आदेश को दरकिनार कर दिया। आयोग ने ट्रक की चोरी के संबंध में जैन कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को बीमा राशि का भुगतान करने के राज्य उपभोक्ता फोरम के निर्देश के खिलाफ ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की याचिका को स्वीकार कर लिया था।

शीर्ष अदालत ने कहा है कि आयोग का आदेश 'गलत' था। अदालत ने कहा है 'जब शिकायतकर्ता ने चोरी के तुरंत बाद प्राथमिकी दर्ज की और जब पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया और संबंधित न्यायालय के समक्ष चालान भी दायर किया और जब बीमाधारक का दावा सही नहीं पाया गया तो बीमा कंपनी यह नहीं कह सकती थी की चोरी के बारे में सूचित करने में देरी हुई थी, इसलिए दावा नहीं बनता।
विज्ञापन


मौजूदा मामले में बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा देने से पल्ला झाड़ लिया था कि इसमें पॉलिसी की शर्त नंबर-एक का उल्लंघन गया था। इस शर्त के अनुसार  बीमाकर्ता को आकस्मिक नुकसान या क्षति के लिए तत्काल नोटिस देना होता है। लेकिन उसने पांच महीने के बाद चोरी के बारे में बीमा कंपनी सूचित किया था।

जिला उपभोक्ता फोरम ने शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपए मुवावजे के साथ बीमा राशि देने का आदेश दिया था। इसके अलावा वाद खर्च के तौर पर पांच हजार रुपए भी देने के लिए भी कहा था। जिला उपभोक्ता आयोग ने आदेश को बीमा कंपनी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में चुनौती दी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें