फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meghalaya High Court: भ्रष्टाचार पर हाईकोर्ट की सख्ती, हाईवे ठेकेदार की पांच साल की ब्लैकलिस्टिंग बरकरार

Tue, 06 Jan 2026 03:24 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग

सार

मेघालय हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते हाईवे ठेकेदार की पांच साल की ब्लैकलिस्टिंग बरकरार रखी। अदालत ने कहा कि लेजर दस्तावेजों से अवैध लाभ और रिश्वतखोरी के ठोस संकेत मिले हैं। इसके बाद कोर्ट ने  ठेकेदार की सभी याचिकाएं खारिज कर दी।
विज्ञापन
मेघालय हाईकोर्ट। - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मेघालय हाईकोर्ट ने एक बड़े सड़क परियोजना से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हाईवे ठेकेदार की पांच साल की ब्लैकलिस्टिंग को सही ठहराया है। अदालत ने साफ कहा कि सार्वजनिक धन और जनहित से जुड़े मामलों में सरकार की कार्रवाई कानूनसम्मत और जरूरी है। इस फैसले से सरकारी ठेकों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट संदेश गया है।
विज्ञापन


मेघालय सरकार के लोक निर्माण विभाग (सड़क) ने वर्ष 2011 में एनएच-44ई और नोंगस्टोइन–रोंगजेंग–तुरा सड़क के दोहरीकरण का ठेका बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और सी एंड सी कंस्ट्रक्शंस के संयुक्त उपक्रम को दिया था। शुरुआती लागत करीब 1,303 करोड़ रुपये थी, जो बाद में संशोधन और अतिरिक्त कार्यों के चलते 2,400 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। काम के दौरान विवाद खड़े हुए और मामला मध्यस्थता तक पहुंचा।

ये भी पढ़ें- मतदाता सूची पर उठे विवाद पर चुनाव आयोग ने दी सफाई, कहा- TMC द्वारा दिए गए नाम गलती से कटे
विज्ञापन


महंगे तोहफे, शराब और मेहमाननवाजी
मध्यस्थता की कार्यवाही के दौरान सरकार ने ठेकेदार द्वारा पेश किए गए लेजर दस्तावेजों की जांच की। इन रिकॉर्ड में महंगे तोहफे, शराब, मेहमाननवाजी और अन्य लाभों पर बार-बार खर्च दर्ज पाया गया। सरकार का आरोप है कि ये लाभ सरकारी अधिकारियों, इंजीनियरों और विवाद समाधान बोर्ड के सदस्यों तक पहुंचाए गए। अदालत ने माना कि ये दस्तावेज प्रथम दृष्टया अवैध रिश्वतखोरी की पुष्टि करते हैं।

सरकार की कार्रवाई और ठेकेदार की दलील
सितंबर 2024 में लोक निर्माण विभाग ने शो-कॉज नोटिस जारी किया और 3 दिसंबर 2024 को ठेकेदार को पांच साल के लिए भविष्य के टेंडरों से बाहर कर दिया। ठेकेदार ने इसे दुर्भावनापूर्ण, देर से की गई और मध्यस्थता को प्रभावित करने वाली कार्रवाई बताया। सरकार ने कहा कि संयुक्त उपक्रम को अब तक 2,523 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है और 94 करोड़ रुपये मध्यस्थता आदेश के तहत दिए गए हैं।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा- जनहित सर्वोपरि
एकल न्यायाधीश जस्टिस एच. एस. थांगख्यू ने याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार अनुबंध की शर्तों और राज्य के अंतर्निहित अधिकार दोनों से निकलता है। अदालत ने माना कि नोटिस में आरोप स्पष्ट थे और ठेकेदार को जवाब का पूरा मौका मिला। परियोजना का आकार, सार्वजनिक धन की मात्रा और आरोपों की गंभीरता देखते हुए पांच साल की पाबंदी को न तो अत्यधिक माना गया और न ही असंगत। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाया गया।

अन्य वीडियो-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें