मेघालय की राजधानी शिलांग में खासी छात्र संघ (केएसयू) की रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने राज्य में केंद्रीय सशस्त्र बलों की पांच कंपनियां तैनात करने को मंजूरी दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मेघालय पुलिस की मदद के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की चार और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की एक कंपनी भेजने की मंजूरी दी है। ये बल 25 अगस्त तक तैनात रहेंगे।
बुधवार को केएसयू की काले झंडे वाली रैली के दौरान शिलांग के फायर ब्रिगेड, नोंगमेंसोंग, पोलो, बारिक और मावलाई इलाकों में पथराव और तोड़फोड़ हुई। अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 31 वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। इनमें अधिकांश सरकारी वाहन थे। एक सरकारी वाहन को आग के हवाले कर दिया गया। कई राहगीरों से मारपीट की भी सूचना है। पूर्वी खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक विवेक सिएम ने बताया कि राहत एवं पुनर्वास कॉलोनी में स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाओं को भी क्षतिग्रस्त किया गया।
केएसयू के तीन नेता गिरफ्तार
हिंसा के बाद पुलिस ने केएसयू अध्यक्ष रेमंड खारजाना, उपाध्यक्ष पिनकेमलांग सनमिएत और महासचिव रूबेन नाजियार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, तीनों को एक होटल से पकड़ा गया। उनके खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और मारपीट समेत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
केएसयू नेताओं ने इससे पहले पत्रकार वार्ता में हिंसा पर खेद जताया था, लेकिन संगठन के सदस्यों के तोड़फोड़ और आगजनी में शामिल होने से इनकार किया। संगठन का आरोप है कि कुछ लोगों ने रैली में घुसकर आंदोलन को बदनाम करने के लिए हिंसा की।
आधी रात को केएसयू कार्यालय में छापे पर विवाद
पुलिस ने बुधवार देर रात जियाव इलाके में स्थित केएसयू कार्यालय में छापा मारा। स्थानीय लोगों के अनुसार, विरोध होने पर पुलिस ने आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। एक स्थानीय बुजुर्ग ने कार्रवाई के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया। केएसयू के पूर्व नेताओं ने भी पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है।
पांच सूत्री मांगों को लेकर हुई थी रैली
केएसयू की रैली पांच सूत्री मांगों को लेकर हुई थी। इनमें निवासी सुरक्षा कानून लागू करना, प्रवासी मजदूरों का नियमन, सरकारी भर्ती में सुधार और एनईआईजीआरआईएचएमएस से जुड़े भर्ती मामलों पर कार्रवाई की मांग शामिल थी। संगठन ने पूर्वी जयंतिया हिल्स में प्रस्तावित श्री सीमेंट परियोजना की 31 जुलाई की जनसुनवाई रद्द करने और मेघालय में इनर लाइन परमिट (आईएलपी) लागू करने की मांग भी की है।