पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और अमेरिकी बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी मर्क के प्रतिनिधि गुरुवार को हुई बैठक में मौजूद थे। प्रतिनिधियों ने अपनी निर्माण क्षमता के साथ-साथ अपने टीकों के मूल्य निर्धारण पर विचार-विमर्श किया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अगले साल राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों में सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ एपीवी वैक्सीन की शुरुआत के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों के साथ बैठक की है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और अमेरिकी बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी मर्क के प्रतिनिधि गुरुवार को हुई बैठक में मौजूद थे। सूत्रों ने बताया कि उन प्रतिनिधियों ने अपनी निर्माण क्षमता के साथ-साथ अपने टीकों के मूल्य निर्धारण पर विचार-विमर्श किया।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा, मंत्रालय द्वारा 2023 की शुरुआत में एचपीवी (ह्यूमन पेपिलोमा वायरस) वैक्सीन की 16.02 करोड खुराक (डोज) के लिए एक वैश्विक निविदा (टेंडर) जारी किए जाने की संभावना है। इस वैक्सीन की 2026 तक आपूर्ति की जाएगी। घरेलू निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अलावा वैश्विक वैक्सीन निर्माता कंपनी मर्क के टेंडर में भाग लेने की संभावना है।
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वर्तमान में, देश एचपीवी वैक्सीन के लिए पूरी तरह से विदेशी निर्माताओं पर निर्भर है। तीन विदेशी कंपनियां एचपीवी टीके बनाती हैं, जिनमें से दो कंपनियां भारत में अपने टीके बेचती हैं। सूत्रों ने कहा कि बाजार में उपलब्ध एक खुराक की कीमत 4,000 रुपये से अधिक है।
सितंबर 2022 में सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार सी पूनावाला ने कहा था कि उनका एचपीवी टीका भारत में 200-400 रुपये प्रति खुराक की सस्ती कीमत पर उपलब्ध होगा।