24 साल से उड़ीसा के मुख्यमंत्री बीजू जनता दल के मुखिया नवीन पटनायक सीएम की कुर्सी के साथ ही कांटाबांजी विधानसभा सीट भी हार गए। नवीन पटनायक को इस सीट पर भाजपा के लक्ष्मण बाग ने शिकस्त दी।
इस सीट पर नवीन को जहां 74 हजार 532 वोट मिले वहीं उनके प्रतिद्वंदी लक्ष्मण बाग ने 90 हजार 876 वोट हासिल किए। जबकि यहां से चार बार के जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस के मौजूदा विधायक सलूजा सिर्फ 26 हजार 839 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। यह पहली बार है जब भाजपा ने कांटाबांजी में जीत हासिल की।
कांटाबांजी में लक्ष्मण बाग 2014 और 2019 में हार गए थे चुनाव
भाजपा नेता लक्ष्मण बाग ने जिस कांटाबांजी सीट पर नवीन पटनायक जैसे दिग्गज को हराया है, उसी सीट पर 2014 में वह तीसरे स्थान पर रहे थे, उस वक्त बीजेडी के अयूब खान ने यहां जीत दर्ज की थी। वहीं 2019 में बाग को कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा से महज 128 वोटों के अंतर से हार मिली थी।
‘नवीन पटनायक की घोषणा के बाद जीत की राह मुश्किल थी’
48 साल के लक्ष्मण बैग ने बताया कि जब नवीन पटनायक ने यह घोषणा कि वह हिंजिली के साथ ही कांटाबांजी विधानसभ सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं, तो उन्हें लगा इस बार जीतना तो और भी मुश्किल है। उन्होंने आगे बताया कि इस बार मतदाता चुप थे और और उन्होंने बड़ी समझदारी से वोटिंग की। इस चुनाव में उन्होंने नवीन पटनायक को 16 हजार 334 वोटों से हरा दिया।
प्रवासी मजदूरों की मदद करके बनाया जनाधार
ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मण बाग ने इस विधानसभा क्षेत्र में बहुत काम किया है। उन्होंने मुसीबत के सम प्रवासी मजदूरों की मदद करके यहां अपना मजबूत आधार बनाया है। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के अलावा 40 हजार की आबादी वाले क्षेत्र में यादव समुदाय से बाग का गहरा संबंध है, इस कारण यादव समुदाय ने भी उनका जमकर समर्थन किया है।
‘सामाजिक कार्यों से लोगों में पहचान बनाई’
लक्ष्मण बाग के एक करीबी ने बताया, ‘2014 से पहले उनको कोई भी राजनीतिक अनुभव नहीं था। ना ही उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि बहुत अच्छी है। लेकिन बाग काफी सालों से समाज के लिए काम कर रहे थे। इसके साथ ही वीएचपी और बजरंग दल से जुड़े हुए थे।’
पटनायक ने कांटाबांजी के अलावा हिंजली में अपने गढ़ से भी चुनाव लड़ा था जहां वह 4 हजार 386 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की ।