कांग्रेस ने शुक्रवार को मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (स्नातक) में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए, ताकि प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को न्याय मिल सके। नीट का परिणाम चार जून को घोषित किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने नीट परीक्षा में कथित धांधली को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा ने युवाओं को ठगा है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पोस्ट किया, पहले नीट परीक्षा का पेपर लीक हुआ और अब छात्रों का आरोप है कि इसके परिणाम में भी भ्रष्टाचार हुआ है।
एक ही सेंटर के 6 छात्रों को 720 में से 720 अंक मिलने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई तरह की अनियमितताओं की बातें सामने आ रही हैं। दूसरी ओर, परिणाम आने के बाद देशभर में कई बच्चों के आत्महत्या करने की खबरें हैं। यह बहुत दुखद और झकझोरने वाला है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार लाखों छात्रों की आवाज को अनसुना क्यों कर रही है?
मूर्तियों की जगह बदलने का पैंतरा भी बचा नहीं पाएगा
संसद परिसर में लगीं महात्मा गांधी, डॉ. बीआर आंबेडकर और छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्तियों को प्रेरणा स्थल में स्थानांतरित करने का विरोध करते हुए कांग्रस ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, यह सरकार की एक चाल है, जिसका उद्देश्य विपक्षी दलों को लोकतांत्रिक ढंग से विरोध प्रदर्शन करने से रोकना है। लेकिन यह पैंतरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अस्थायी सरकार को गिरने से नहीं बचा सकता।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा, कल दोपहर 2:30 बजे मैंने जिक्र किया था कि सरकार छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा गांधी और डॉ. आंबेडकर की मूर्तियों को संसद भवन में उनके मौजूदा स्थान से हटा रही है। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने पूरी तरह फर्जी व मनगढ़ंत व्याख्या जारी की।
सीपीआई महासचिव डी राजा ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, संसद परिसर में महात्मा गांधी, डॉ. आंबेडकर और छत्रपति शिवाजी की मूर्तियों को स्थानांतरित करने का मनमाना और एकतरफा निर्णय निंदनीय है। सीपीआई के राज्यसभा सांसद बिनय विश्वम ने लिखा, सरकार को समावेशी इतिहास से छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। ये मूर्तियां महज धातु, ईंट और गारे से बनी नहीं हैं, बल्कि ये हमारे देश की मुक्ति, समानता के संघर्ष की अदम्य भावना का प्रतीक हैं।