भाजपा के 60 विधायकों में से इकलौते मुस्लिम विधायक अमिनुल हक लश्कर अपने नाम के अनुरूप भाजपा के साथ मुस्तैदी से खड़े दिखते हैं। इतनी मुस्तैदी से कि ये कहने में भी गुरेज नहीं करते कि मैं पहले भाजपा विधायक हूं बाद में अल्पसंख्यक (मुस्लिम)।
भाजपा के टिकट पर चुनकर आए अनीमुल हक एक करोड़ से ज्यादा की मुस्लिम आबादी वाले राज्य में भाजपा के बड़े मुस्लिम नुमाइंदे की तरह हैं। उन्होंने सोनई सीट से जीत दर्ज की है जहां कुल वोटों में से 98 हजार मुस्लिम वोट हैं।
इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में लश्कर ने बताया कि उन्होंने भाजपा के मुख्यमंत्री पद के चेहरे सर्बानंद सोनोवाल के साथ एक ही दिन असम गण परिषद छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली थी। वो बताते हैं कि यह 2011 का साल था, उस समय नितिन गड़करी भाजपा के अध्यक्ष थे।
लश्कर पहले आल असम स्टूडेंट यूनियन में थे और वहां से 1995 में अगप की सदस्यता ग्रहण की थी। उस समय पार्टी कठिन समय से गुजर रही थी। तब मैने यह महसूस किया कि अगर मैं लोगों के लिए काम करना चाहता हूं तो मेरा यहां रहने का कोई तुक नहीं बनता है। लश्कर बेबाकी से स्वीकार करते हैं कि मैं मुख्यतः एंटी कांग्रेस माइंडसेट वाला व्यक्ति हूं इसलिए मेरे सामने एकमात्र विकल्प भाजपा थी। मैंने यह महसूस किया कि भाजपा का भविष्य चमकदार है।