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मैं पहले भाजपा विधायक बाद में अल्पसंख्यकः अमिनुल हक

Mon, 23 May 2016 05:53 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा के 60 विधायकों में से इकलौते मुस्लिम विधायक अमिनुल हक लश्कर अपने नाम के अनुरूप भाजपा के साथ मुस्तैदी से खड़े दिखते हैं। इतनी मुस्तैदी से कि ये कहने में भी गुरेज नहीं करते कि मैं पहले भाजपा विधायक हूं बाद में अल्पसंख्यक (मुस्लिम)। 
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भाजपा के टिकट पर चुनकर आए अनीमुल हक एक करोड़ से ज्यादा की मुस्लिम आबादी वाले राज्य में भाजपा के बड़े मुस्लिम नुमाइंदे की तरह हैं। उन्होंने सोनई सीट से जीत दर्ज की है जहां कुल वोटों में से 98 हजार मुस्लिम वोट हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में लश्कर ने बताया कि उन्होंने भाजपा के मुख्यमंत्री पद के चेहरे सर्बानंद सोनोवाल के साथ एक ही दिन असम गण परिषद छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली थी। वो बताते हैं कि यह 2011 का साल था, उस समय नितिन गड़करी भाजपा के अध्यक्ष थे। 
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लश्कर पहले आल असम स्टूडेंट यूनियन में थे और वहां से 1995 में अगप की सदस्यता ग्रहण की थी। उस समय पार्टी कठिन समय से गुजर रही थी। तब मैने यह महसूस किया कि अगर मैं लोगों के लिए काम करना चाहता हूं तो मेरा यहां रहने का कोई तुक नहीं बनता है। लश्कर बेबाकी से स्वीकार करते हैं कि मैं मुख्यतः एंटी कांग्रेस माइंडसेट वाला व्यक्ति हूं इसलिए मेरे सामने एकमात्र विकल्प भाजपा थी। मैंने यह महसूस किया कि भाजपा का भविष्य चमकदार है।
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सोनोवाल के साथ अगप छोड़कर भाजपा में हुए थे शामिल

50 साल के लश्कर बेंगाली में सरकारी ठेकेदार के तौर पर काम करते हैं। उनके निर्वाचन क्षेत्र की 95 फीसदी मुस्लिम आबादी बंगला भाषा ही बोलती है, जबकि  22 हजार के करीब हिंदू भी बंगाली ही बोलते हैं। भाजपा को लेकर मुस्लिमों में तरह तरह की चर्चाओं पर लश्कर कहते हैं कि भाजपा के बारे में मुस्लिम समाज को गुमराह किया गया है। लेकिन अब यह बदल रहा है। 

इस बार काफी संख्या में मुस्लिमों ने भाजपा को वोट दिया है। वो सफाई देते हैं कि भारत के मुसलमान भाजपा का विरोध नहीं करते, यह काम बांग्लादेश से आने वाले मुस्लिम करते हैं। असम के मुख्यमंत्री बनने वाले सोनोवाल के साथ लंबे समय से जुड़े रहे लश्कर के खिलाफ कई मुकदमे भी दर्ज हैं। 

उनकी अहमियत को देखते हुए पार्टी ने भी उन्हें मुस्लिम चेहरे के तौर पर आगे ही रखा। जब उनसे यह पूछा जाता है कि उन्हें मंत्रीमंडल में कोई पद मिल सकता है तो उनका जवाब होता है कि जनता ने मुझे विजेता बनाया है बाकी सब मुख्यमंत्री पर निर्भर करता है। मैं उनका आदर करता हूं। वह यह कहना भी नहीं भूलते कि मैं पहले अल्पसंख्यक नहीं भाजपा का विधायक हूं।
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