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'गंगा आपके पाप का ख्याल रखेगी, कचरे का नहीं'

Mon, 23 May 2016 04:09 PM IST
जस्टिन रॉलट/ दक्षिण एशिया संवाददाता
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- फोटो : bbc
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दुनिया की सबसे महान नदियों में शामिल गंगा नदी धीरे-धीरे मर रही है। हिमालय की चोटियों से निकलने और बंगाल की खाड़ी में गिरने तक गंगा काफी मैली और ज़हरीली होती जाती है। भले ही इसे गंगा मैया के नाम से जाना जाता हो, हक़ीकत ये भी है कि गंगा अपने तट पर बसे करीब 45 करोड़ लोगों के कचरे को भी ढोती है। 
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इसके किनारे बनी फैक्ट्रियों का कचरा नदी में गिरने और हिंदू रीति रिवाज के मुताबिक इसके तटों पर अंतिम संस्कार किए जाने से नदी का पानी लगातार दूषित हो रहा है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले गंगा को स्वच्छ बनाने का वादा किया था।

लेकिन सवाल यही है कि क्या वे इसे कर सकते हैं? क्या गंगा को बचाया जा सकता है? गंगा गंगोत्री से निकलती है और वहां का दृश्य विहंगम दिखता है। नीला आसमान और सफ़ेद पिघलती बर्फ जैसे दूर कहीं मिल रहे हों।
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इसे हिंदू बेहद पवित्र जगह मानते हैं। एकदम ठंडी हवाओं के बीच यहां गंगा का पानी एकदम शुद्ध होता है। ग्लेशियर के निचले हिस्से पर गौमुख है, जो गाय के मुंह जैसा बना हुआ है। वहीं से गंगा का प्रवाह शुरू होता है। उसी गंगा का जिसे भारतीय संस्कृति का वाहक माना जाता है।

जैसे-जैसे गंगा नीचे आती है, इसकी गति और दायरा लगातार बढ़ता जाता है, इसमें दूसरी हिमनदियों का साथ मिलता जाता है। लेकिन अब कई अध्ययन बता रहे हैं कि हिमालय पर्वत पर ही पानी तेजी से प्रदूषित होने लगा है।

जैसे-जैसे आप नीचे आते हैं, गंगा की मुश्किलें बढ़ती जाती हैं। ऋषिकेश में स्वामी चिदानंद सरस्वती संध्या आरती का आयोजन करते हैं। इसमें घी के दिए जलाए जाते हैं और साथ में भजन आरती होती है। स्वामी के साथ उनके 50 पुजारी भी आरती में शामिल होते हैं जिसे देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु हर शाम जमा होते हैं।

तुम गंगा का ख्याल रखो वो तुम्हारा रखेगी

- फोटो : bbc
गंगा नदी में सांध्य आरती उत्सव सरीखा आयोजन है। करीब 2500 किलोमीटर लंबे सफ़र में ऐसी आरती कई शहरों में होती है। श्रद्धालु पूरे दिन गंगा नदी में स्नान करते हैं, यह पुण्य माना जाता है। हिंदू गंगा नदी को देवी के तौर पर देखते हैं।

लोग मानते हैं कि गंगा पृथ्वी पर स्वर्ग से आई है। उसमें नहाने भर से सारे पाप धुल जाते हैं। स्वामी ने ऋषिकेश में विशाल आश्रम बनाया हुआ है। मैंने उनसे पूछा कि उनके कितने शिष्य होंगे तो उन्होंने सकुचाते हुए कहा यही कोई दस लाख।

लेकिन जब मैंने उनसे गंगा के प्रदूषण की बात की तो उनका नजरिया बदला हुआ दिखा। उन्होंने कहा कि कई लोग सोचते हैं कि गंगा न केवल दूसरों के पाप धोती है बल्कि उसमें ख़ुद को भी स्वच्छ रखने की ताक़त है। उन्होंने कहा, ''लोग सोचते हैं कि गंगा मेरे पाप धोएगी और सब चीज़ों का ख़्याल रखेगी। वे भूल जाते हैं कि गंगा आपके पापों का ख़्याल रखेगी लेकिन आपके कचरे का नहीं, आपके प्रदूषण का नहीं।''
 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मानते हैं कि गंगा की सफ़ाई का काम उन्हें ईश्वर ने सौंपा है

- फोटो : EPA
वे गंगा नदी की सफ़ाई के लिए गंभीर प्रयास करने के लिए अभियान चला रहे हैं। उन्हें इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है कि गंगा मर रही है। वे कहते हैं लोग अपनी मां को मार रहे हैं, लेकिन वे इस नदी को बचाने के प्रति प्रतिबद्ध भी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मानते हैं कि गंगा की सफ़ाई का काम उन्हें ईश्वर ने सौंपा है।

उन्होंने दो साल पहले चुनावी जीत हासिल करने के बाद कहा था, ''मां गंगा ने मुझे बुलाया है। वे मुझे कोई ज़िम्मेदारी सौंपना चाहती हैं। मां गंगा मदद के लिए चिल्ला रही हैं, कह रही हैं कि उन्हें उम्मीद है कि उनका एक बेटा मुझे गंदगी से बाहर निकालेगा।

यह संभव है कि ईश्वर ने तय किया हो कि मुझे मां गंगा की सेवा करनी है।'' उन्होंने गंगा की सफ़ाई के मिशन पर अगले पांच साल में तीन अरब डॉलर खर्च करने का वादा किया है। उन्होंने इस मिशन को अपना सिग्नेचर प्रोजेक्ट्स बनाया है। पहले भी कई भारतीय नेताओं ने ऐसी पहल की है।

1980 के दशक में राजीव गांधी ने बड़े पैमाने पर साफ़-सफ़ाई के कार्यक्रम कराए थे और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनवाए थे। लेकिन उससे समस्या हल नहीं हुई थी। इसके उलट गंगा धीरे-धीरे कहीं ज़्यादा प्रदूषित होती गई। खबर से संबंधित वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें।
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