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Medicinal Plant Survey: देश में पहली बार औषधीय पौधों का होगा सर्वे, वैश्विक आपूर्ति का चलेगा पता

Tue, 02 Jan 2024 05:42 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय आयुष मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने सह सर्वेक्षण व अध्ययन का फैसला लिया है, जिसे लेकर संस्थानों से प्रस्ताव मांगा है। बोर्ड का मानना है कि दुनिया भर में हर्बल उत्पादों की मांग बढ़ने से औषधीय पौधों की औद्योगिक मांग भी बढ़ रही है।
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Vana Tulsi - फोटो : iStock
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विस्तार
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साल के पहले दिन केंद्र सरकार ने देश के औषधीय पौधों का सर्वे करने का फैसला लिया है। साथ ही औषधीय पौधों की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग व आपूर्ति का पता लगाने के लिए अध्ययन भी किया जाएगा। हिमाचल से पूर्वोत्तर राज्यों तक के दुर्गम स्थानों पर मौजूद औषधियों व जड़ी बूटियां भी शामिल हैं।

केंद्रीय आयुष मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने सह सर्वेक्षण व अध्ययन का फैसला लिया है, जिसे लेकर संस्थानों से प्रस्ताव मांगा है। बोर्ड का मानना है कि दुनिया भर में हर्बल उत्पादों की मांग बढ़ने से औषधीय पौधों की औद्योगिक मांग भी बढ़ रही है। इन पौधों से कॉस्मेटिक उत्पाद और हर्बल पोषण बनाए जा रहे हैं।

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हालांकि औषधीय पौधों, उनके औषधीय उपयोग और भौगोलिक विस्तार को लेकर भारत के पास बेहद सीमित जानकारी उपलब्ध है। खासतौर पर इन पौधों की मांग और खपत के बारे में राष्ट्रीय स्तर पर सही डाटा भी मौजूद नहीं है। ऐसे में सरकार ने नए सिरे से अध्ययन कराने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।

आयुष मंत्रालय का कहना है कि औषधीय पौधों की खपत का अनुमान इससे भी लगाया जा सकता है कि भारत में अभी केवल 10 कंपनियां 75 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं जबकि हर्बल क्षेत्र में कंपनियों की सूची 500 से भी ज्यादा है।
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इसी तरह दुनिया के 37 देशों में भारत से औषधीय पौधों से निर्मित कच्चा माल जा रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत अपनी इस क्षमता को और कितना बढ़ा सकता है? इसके बारे में सही जानकारी होना भी जरूरी है।

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि औषधीय पौधे वे पौधे हैं जिनका उपयोग पौधे के किसी भी भाग से दवाएं बनाने के लिए किया जा सकता है। इनका उपयोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों और व्याधियों के इलाज के लिए किया जा सकता है। मौजूदा समय में दवाओं के साथ साथ इनका इस्तेमाल हर्बल उत्पादों पर भी किया जा रहा है।

भारतीय औषधियों के दम पर ही सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने मधुमेह रोगियों के लिए बीजीआर-34 दवा की खोज की जिसका उत्पादन एमिल फार्मास्युटिकल्स कर रहा है। इसी तरह किडनी रोगियों के लिए नीरी केएफटी, प्रदूषण और सूखी खांसी के लिए जूफेक्स, हर्बल उत्पादों के लिए आयुथवेदा, एमिली प्लस जैसे उत्पादों की बड़ी श्रृंखला बाजार में मौजूद है जिन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में काफी प्रभावी पाया गया है।

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