जापान की प्रमुख चिकित्सा उपकरण बाने वाली एजेंसी और ओसाका यूनिवर्सिटी के साथ एम्स का करार हुआ है। पिछले सप्ताह एम्स में इन एजेंसियों और यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने आपस में मुलाकातें कर इसको बढ़ाने की रूपरेखा पर काम किया। इस दौरान तय हुआ की जापानी यूनिवर्सिटी और उपकरण निर्माण करने वाली कंपनी एम्स के चिकित्सकों को न सिर्फ तकनीकी मदद करेगी बल्कि इस केंद्र में चिकित्सा उपकरणों को विकसित भी करेगी। इसको जल्द ही जमीन पर उतारने के लिए जापान के विशेषज्ञों ने एम्स के झज्जर स्थित कैंसर संस्थान का दौरा भी किया था।
एम्स प्रशासन के मुताबिक राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण विकास, सत्यापन एवं कौशल प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने को लेकर चर्चा हुई है। इस दौरान एम्स के निदेशक डॉक्टर एम. श्रीनिवास समेत कई विशेषज्ञ भी मौजूद थे। प्रशासन के मुताबिक चिकित्सकीय उपकरणों के विकास के साथ मरीजों में बेहतर चिकित्सा प्रणाली से उसका निदान करना प्राथमिकता है। एम्स के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एचके भट्टाचार्य ने बताया कि अभी भी हम लोग बहुत ज्यादा चिकित्सा उपकरण नहीं तैयार करते हैं। ज्यादा मात्रा में ऐसे उपकरण विदेश से ही मंगवाए जाते हैं। अब केंद्र सरकार मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों को भी बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। यही वजह है कि राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण विकास, सत्यापन एवं कौशल प्रशिक्षण केंद्र बनाने का निर्णय लिया गया है।
एम्स प्रशासन के मुताबिक अगले दो से तीन साल के भीतर यह सेंटर बनकर तैयार हो जाएगा। योजना के मुताबिक इस केंद्र में एम्स के विशेषज्ञों के साथ जापानी एक्सपर्ट्स मिलकर रिसर्च भी करेंगे। जिससे चिकित्सकीय उपकरण भी बेहतर तरीके से तैयार हो सकें और देश में मरीजों को अच्छा इलाज मिल सकें।