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गुजरात में चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं: अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए 10,000 डॉक्टर, जानें पूरा मामला

Mon, 04 Apr 2022 06:35 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

हड़ताल के पहले दिन गुजरात मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सोसाइटी द्वारा संचालित सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में सेवाएं चरमरा गईं। हड़ताल के कारण इन डॉक्टरों ने मरीजों को देखने से इनकार कर दिया।
 
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डॉक्टरों की हड़ताल(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुजरात में डॉक्टरों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। यहां के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं व्यापक स्तर पर प्रभावित हुई हैं। दरअसल, गुजरात में सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के कम से कम 10,000 सरकारी डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।

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डॉक्टर संविदा सेवाओं को नियमित करने, सरकारी अस्पतालों और पीएचसी में चिकित्सा सेवाओं सुधारने सहित अपनी कई लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कहा कि सरकार ने वादा किया था कि हमारी सभी मांगें 31 मार्च, 2022 तक पूरी हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार के आश्वासन के बाद हमने अपनी हड़ताल रद्द कर दी थी, लेकिन ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया है। जीएमटीए के महासचिव डॉ जयेंद्र मकवाना ने कहा कि हमें जल्द ही आदेश के बारे में कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। ऐसे में हमारे पास हड़ताल का सहारा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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हड़ताल के पहले दिन राज्य के स्वास्थ्य विभाग के गुजरात मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सोसाइटी द्वारा संचालित सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में सेवाएं चरमरा गईं। हड़ताल के कारण इन डॉक्टरों ने मरीजों को देखने से इनकार कर दिया।

गुजरात मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (जीएमटीए) के अध्यक्ष डॉ रजनीश पटेल ने कहा कि राज्य भर में लगभग 10,000 सरकारी डॉक्टर मांगों के समाधान के इंतजार में सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। इसमें सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल, छह मेडिकल कॉलेज और नौ जीएमईआरएस कॉलेज आदि में तैनात सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।

पटेल ने कहा कि हड़ताल पर गए डॉक्टर सातवें वेतन आयोग के अनुसार एढ़ाक सेवाओं, विभागीय पदोन्नति और एनपीए को जारी रखने और नियमित करने की मांग कर रहे हैं। जीएमटीए के एक अन्य सदस्य ने कहा कि सभी डॉक्टर पिछले नवंबर से अपनी मांगों को लेकर वार्ता कर रहे हैं। उन्होंने कई बार प्रयास किया कि सरकार के साथ बातचीत के जरिए उनके मुद्दों का समाधान हो।
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