असम पुलिस ने कछार जिले में पिछले महीने जिन तीन युवकों को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था, उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। तीनों के शरीर पर गोली से घाव के निशान नहीं मिले हैं, बल्कि प्राइवेट पार्ट सहित शरीर के अन्य अंगों पर चोट मिली हैं।
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट में शरीर पर खरोंच और घाव के निशान थे लेकिन ये गोलियों के कारण नहीं थे। असम पुलिस ने आतंकवादी बता कर जिन्हें मार गिराने का दावा किया था उनमें लल्लुंगावी हमार (21), लालबीकुंग हमार (33) और जोशुआ (32) शामिल थे। जोशुआ मणिपुर का रहने वाला था, जबकि अन्य दो कछार के थे।
याचिकाकर्ताओं की वकील देबास्मिता घोष ने बताया कि पीड़ित परिवार ने हत्या का आरोप लगाते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय में याचिका दी थी। परिवार ने मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी, साथ ही एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की थी।
देबास्मिता ने कहा, "पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तीनों के शवों पर कई घाव थे। युवकों के निजी अंगों पर चोट के निशान थे। ये घाव केवल मुठभेड़ से नहीं हो सकते।’’
अदालत ने तीन युवकों की मौत के मामले में असम सरकार को नोटिस दिया है, जिसमें परिवार के द्वारा की गई शिकायत को लेकर जिम्मेदार पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
असम पुलिस ने दावा किया था कि 17 जुलाई को कछार जिले में सुरक्षा बलों के साथ जबरदस्त मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। पुलिस ने बताया था कि तीनों के पास से अत्याधुनिक हथियार मिले थे।
पुलिस के मुताबिक एक टीम विद्रोहियों की तलाश में भबन हिल्स इलाके में गई थी, तभी पुलिस और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हो गई। जिसमें तीन आतंकियों को मार गिराने का दावा किया था। इस दौरान तीन पुलिसकर्मी भी गोली लगने से घायल हो गए थे। जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।