नेपाल के विदेश मंत्री ने किया था दावा?
भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख दर्रे के जरिए व्यापार फिर से शुरू करने के फैसले के एक दिन बाद नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताई। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख के क्षेत्र महाकाली नदी के पूर्व में स्थित हैं और ऐतिहासिक रूप से नेपाल का हिस्सा हैं।
नेपाल लंबे समय से भारत से अनुरोध करता रहा है कि वह इन इलाकों में सड़क निर्माण या किसी तरह की गतिविधि (जैसे सीमा व्यापार) न करे। हालांकि भारत लगातार कहता रहा है कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा भारत के भूभाग में आते हैं। भारत ने नेपाल द्वारा 2020 में नया राजनीतिक नक्शा जारी करने को एकतरफा और बनावटी दावा बताया था, जिसे वह मान्यता नहीं देता।
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अब समझिए क्या है विवाद की जड़?
गौरतलब है कि 2020 में नेपाल ने अपना राजनीतिक नक्शा संशोधित करके इन तीन इलाकों को अपने क्षेत्र में शामिल कर लिया था। इसके लिए उसने संविधान में संशोधन भी किया था। भारत ने इसे खारिज करते हुए एकतरफा फैसला बताया। ऐसे में जब बीते दिनों भारत और चीन के बीच व्यापार को लेकर बातचीत हुई तो नेपाल की मीडिया ने सवाल उठाया। इसके बाद नेपाल सरकार ने कहा कि वह पहले ही भारत और चीन दोनों को सूचित कर चुकी है कि लिपुलेख और उससे जुड़े इलाके नेपाल की जमीन हैं।
नेपाल ने दोहराया कि वह इस सीमा विवाद को ऐतिहासिक समझौतों, नक्शों और तथ्यों के आधार पर शांतिपूर्ण और कूटनीतिक तरीके से सुलझाना चाहता है। हालांकि बात अगर भूगोल की करें तो नेपाल की सीमा भारत के पांच राज्य, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से मिलती है, जिसकी कुल लंबाई करीब 1,850 किलोमीटर है।