अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट रविन्द्र कुमार ने अकबर और रमानी की दलीलें पूरी होने के बाद मामले में फैसला एक फरवरी को सुरक्षित रख लिया था और कहा था कि अदालत दस फरवरी को अपना फैसला सुनाएगी । अकबर ने कोर्ट से महिला पत्रकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि रमानी ने उनकी प्रतिष्ठा खराब करने के लिए 20 वर्ष बाद झूठे आरोप लगाए हैं। यदि यौन शोषण हुआ था तो वह इतने वर्ष चुप क्यों रहीं। इसके अलावा वह ऐसा एक भी साक्ष्य पेश नहीं कर पाईं कि उनके साथ कब और कहां यौन शोषण हुआ और न ही इस बात का कोई गवाह है। ऐसे में मानहानि के आरोप में उन्हें दंडित किया जाए।
वहीं, दूसरी तरफ महिला पत्रकार ने कोर्ट से अपनी दलील में कहा कि अकबर की साफ छवि नहीं है और कई अन्य महिलाओं ने भी उन पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, 'बंद कमरे में हुई घटनाओं के कोई गवाह नहीं होते। ऐसे में याचिका खारिज की जाए।'
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में मी टू मुहिम के तहत पत्रकार प्रिया रमानी द्वारा पूर्व विदेश मंत्री एम. जे.अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने पर 15 अक्टूबर, 2018 को रमानी के खिलाफ अकबर ने उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इस घटना के बाद अकबर को 17 अक्टूबर, 2018 को केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने मी टू मुहिम के दौरान तमाम महिलाओं द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों को खारिज किया था।
गौरतलब है कि मनोरंजन और पत्रकारिता जगत समेत कई क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने साल 2018 में शुरू हुए मी टू मुहिम के तहत सोशल मीडिया पर अपने साथ हुए दुर्व्यवहार को लोगों से साझा किया और कई ताकतवर लोगों पर यौन शोषण के आरोप लगाया था।