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MCD Election: नगर निगम में सेंचुरी लगाने की रणनीति पर चल रही कांग्रेस, इस तरह अपनी टैली बढ़ाने की कर रही कोशिश

सार

कांग्रेस ने इस बार मुस्लिम मतदाता बहुल सीटों पर मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। ओखला, जामियानगर, सीलमपुर, पुरानी दिल्ली, चावड़ी बाजार, जहांगीरपुरी, चांदनी महल, भजनपुरा, श्रीराम कॉलोनी और अन्य इलाकों में मजबूत उम्मीदवारों को अवसर दिया है।
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राजस्थान यूथ कांग्रेस पदाधिकारी हटाए गए - फोटो : Social Media
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विस्तार
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कांग्रेस दिल्ली नगर निगम चुनाव (MCD Election 2022) से दिल्ली की राजनीति में वापसी करने का प्लान बना रही है। इसके लिए वह अपने पारंपरिक वोट बैंक को वापस पाने की कोशिश कर रही है तो सभी नगर निगम सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारकर अपनी सीट संख्या बढ़ाने की कोशिश भी कर रही है। पार्टी का अनुमान है कि वह इस बार नगर निगम चुनाव में जीत की सेंचुरी लगाने में कामयाब रहेगी। इससे 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए उसकी राहें भी खुल सकेंगी।

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दिल्ली में मुसलमान, दलित और पूर्वांचली मतदाता कांग्रेस की राजनीति की रीढ़ हुआ करता था। इसके साथ ही उसे पंजाबी, गूजर, जाट और दिल्ली के पढ़े-लिखे वर्ग का साथ भी मिलता था। अरविंद केजरीवाल की राजनीति के साथ ही दलित और मुसलमान मतदाताओं की एक बड़ी संख्या आम आदमी पार्टी के साथ चली गई जिससे कांग्रेस दिल्ली की राजनीति में कमजोर पड़ गई। लेकिन पार्टी अब अपने इस वोट बैंक को संभालने की रणनीति में जुट गई है।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के एक नेता ने अमर उजाला को बताया कि पार्टी ने मुसलमान मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए लगातार उनके मुद्दों की लड़ाई लड़ी है। शाहीन बाग में हुए एनआरसी-सीएए आंदोलन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुए आंदोलन, जहांगीर पुरी और दिल्ली दंगों के दौरान भी वह मुसलमानों के साथ पूरी तरह डट कर खड़ी रही। राष्ट्रीय स्तर पर उसके नेता राहुल गांधी और पार्टी ने लगातार मुसलमानों के मुद्दों पर मुखर आवाज उठाई, जबकि इसी दौरान अरविंद केजरीवाल ने मुसलमानों के मुद्दों पर ठोस आवाज नहीं उठाई।
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वे गुजरात चुनाव में भी बिल्किस बानो से जुड़े मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं, जबकि कांग्रेस लगातार राष्ट्रीय स्तर पर बिल्किस बानो के अपराधियों को दुबारा जेल के पीछे भेजने की मांग कर रही है। यही कारण है कि मुसलमान मतदाताओं के बीच केजरीवाल की विश्वसनीयता कम हुई, जबकि कांग्रेस की साख मजबूत हुई। कांग्रेस नेता के मुताबिक, उन्हें विश्वास है कि इस स्थिति में मतदाता इस बार उनकी ओर रुख करेंगे और पार्टी को इसका लाभ मिलेगा।

मजबूत उम्मीदवार उतारे

कांग्रेस ने इस बार मुस्लिम मतदाता बहुल सीटों पर मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। ओखला, जामियानगर, सीलमपुर, पुरानी दिल्ली, चावड़ी बाजार, जहांगीरपुरी, चांदनी महल, भजनपुरा, श्रीराम कॉलोनी और अन्य इलाकों में मजबूत उम्मीदवारों को अवसर दिया है। साथ ही जिन सीटों पर मुस्लिम मतदाता कम, लेकिन अच्छी संख्या में हैं, वहां भी मुस्लिम उम्मीदवार उतारे गए हैं। पार्टी को इस रणनीति का लाभ मिल सकता है।

दलित मतदाताओं का साथ पाने के लिए पार्टी ने रविदास मंदिर का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया है। सर्वोच्च न्यायालय में मंदिर के पुनर्निर्माण की बात स्वीकार करने के बाद भी अब तक संंत रविदास का मंदिर दुबारा नहीं बनवाया गया है। इससे दलित मतदाताओ में रोष है, जबकि दिल्ली सरकार ने भी इस मुद्दे पर कोई पहल नहीं की है। कांग्रेस को लग रहा है कि दिल्ली सरकार की इन गलतियों का लाभ उसे हो सकता है।

दिल्ली कांग्रेस के नेता के मुताबिक, पार्टी इस बार अपनी पिछली 30 सीटें बचाकर रखने के साथ दो दर्जन से अधिक नई सीटें हासिल करने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतर रही है। जबकि 50 अन्य सीटों पर उसके उम्मीदवार मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। यदि ये समीकरण सही बैठते हैं तो पार्टी की दिल्ली की सियासत में मजबूत वापसी हो सकती है।

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