किताब में शर्मिष्ठा बताती हैं कि उनके पिता ने उन्हें यह भी बताया था कि शायद राजनीति राहुल के लिए नहीं बनी है और उनकी रानजीतिक समझ की कमी उनके लगातार गायब रहने के अलावा एक समस्या पैदा कर रही है। किताब में कहा गया है कि राहुल गांधी ने 27 सितंबर, 2013 को पूर्व कैबिनेट मंत्री और पार्टी के संचार विभाग के प्रमुख अजय माकन द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रें में भाग लिया था और प्रस्तावित सरकारी अध्यादेश को पूरी तरह से बकवास कहा था। फिर सभी को आश्चर्यचकित करते हुए अध्यादेश की एक प्रति फाड़ दी।
अध्यादेश का मकसद दोषी विधायकों को तत्काल अयोग्य ठहराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार करना था, और इसके बजाय प्रस्ताव दिया गया था कि वे उच्च न्यायालय में अपील लंबित होने के दौरान सदस्य के रूप में बने रह सकते हैं। प्रणब मुखर्जी ने देश के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया और बाद में विदेश, रक्षा, वित्त और वाणिज्य मंत्री बने। वह भारत के 13वें राष्ट्रपति (2012 से 2017) थे। 31 अगस्त, 2020 को 84 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
शर्मिष्ठा लिखती हैं कि उनके पिता खुद अध्यादेश के खिलाफ थे और सैद्धांतिक रूप से राहुल से सहमत थे। लेकिन जिस तरह से राहुल ने काम किया, उससे वह हैरान थे। मैंने ही सबसे पहले उन्हें यह खबर दी थी। बहुत दिनों के बाद, मैंने अपने पिता को इतने गुस्से में देखा! उनका चेहरा लाल हो गया और वह चिल्लाए, 'उन्हें (राहुल) क्या लगता है कि वह कौन हैं? वह मंत्रिमंडल के सदस्य नहीं हैं। वह कैबिनेट के फैसले को सार्वजनिक रूप से खारिज करने वाले कौन होते हैं?
उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री विदेश में हैं। क्या उन्हें अपने कार्यों के निहितार्थ और प्रधानमंत्री और सरकार पर इसके प्रभाव का एहसास भी है? उन्हें प्रधानमंत्री को इस तरह अपमानित करने का क्या अधिकार है मुखर्जी अपनी डायरी में इस घटना के बारे में भी लिखा था। यह पूरी तरह से अनावश्यक है। उनमें गांधी-नेहरू वंश का सारा अहंकार उनके राजनीतिक कौशल के बिना है।'
शर्मिष्ठा का कहना है कि बहुत बाद में 2014 में राजनीति में शामिल होने के बाद वह अपने पिता के साथ उस वर्ष कांग्रेस के पतन के कारणों पर चर्चा कर रही थीं। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के सत्ता में आने के बाद कांग्रेस अब तक के सबसे निचले स्तर 44 सीटों पर आ गई। उन्होंने कहा, 'उन्होंने मुझसे कहा कि अन्य कारणों के अलावा राहुल का गुस्सा कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील था। पार्टी के उपाध्यक्ष ने सार्वजनिक रूप से अपनी ही सरकार के प्रति ऐसा तिरस्कार दिखाया था। लोग आपको फिर से वोट क्यों दें?'
जब शाम की जगह सुबह ही प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुंचे राहुल गांधी
शर्मिष्ठा मुखर्जी कहती हैं, एक दिन सुबह राहुल गांधी उनसे (प्रणब मुखर्जी से) मिलने आए। जबकि राहुल को उस शाम को उनसे मिलना था। जब मैंने अपने पिता से इसका जिक्र किया तो उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अगर राहुल का कार्यालय एएम और पीएम के बीच अंतर नहीं कर पाता है तो वे एक दिन पीएमओ को कैसे चला पाएंगे।