फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मायावती का 2024 प्लानः सपा का सर्वश्रेष्ठ दिख चुका, अब बसपा की बारी, मुस्लिम मतदाताओं के खिसकने से हुई हार

सार

बसपा का मानना है कि यह चुनाव जानबूझकर ‘भाजपा बनाम सपा’ की आमने-सामने की लड़ाई में तब्दील किया गया। सपा ने यह काम ज्यादा वोटों के लालच में किया तो भाजपा को लग रहा था कि वह ‘सुरक्षा’ के जिस मुद्दे पर पूरा चुनाव लड़ने जा रही है, उस पर केवल अखिलेश यादव को ही निशाने पर लिया जा सकता है।
विज्ञापन
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट पर सिमट कर रह जाने वाली बसपा को इस चुनाव परिणाम में ही पार्टी का भविष्य भी दिख रहा है। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि इस चुनाव परिणाम ने यह बात साबित कर दिया है कि हर समाज के पूरे समर्थन के बाद भी समाजवादी पार्टी भाजपा को रोकने में सक्षम नहीं है, इसलिए जो लोग भी भाजपा को रोकने के लिए एक राजनीतिक विकल्प की तलाश में होंगे, 2024 में उन्हें बसपा में ही उम्मीद दिखाई पड़ेगी। अब पार्टी एक जन अभियान चलाकर मतदाताओं में यही बात बिठाने की कोशिश करेगी कि वह उनकी उम्मीदों पर खरी उतर सकती है, लिहाजा भाजपा के विकल्प के रूप में उन्हें बसपा को प्राधमिकता देनी चाहिए।

विज्ञापन


बसपा का मानना है कि यह चुनाव जानबूझकर ‘भाजपा बनाम सपा’ की आमने-सामने की लड़ाई में तब्दील किया गया। सपा ने यह काम ज्यादा वोटों के लालच में किया तो भाजपा को लग रहा था कि वह ‘सुरक्षा’ के जिस मुद्दे पर पूरा चुनाव लड़ने जा रही है, उस पर केवल अखिलेश यादव को ही निशाने पर लिया जा सकता है। मायावती अपराधियों को निशाने पर लेने के लिए हमेशा मशहूर रही हैं, लिहाजा उन पर यह मुद्दा काम नहीं करेगा। यही कारण रहा कि भाजपा-सपा ने मीडिया के जरिए पूरा चुनाव आमने-सामने की लड़ाई में तब्दील कर दिया और बसपा को इसका नुकसान हुआ।

मुस्लिम और जाटव वोटों ने भी किया किनारा
पार्टी रणनीतिकारों ने स्वीकार किया है कि एक विकल्प की तलाश में मुस्लिम मतदाताओं ने पूरी तरह समाजवादी पार्टी का समर्थन कर दिया जिससे उसकी करारी हार हुई। जिन सीटों पर पार्टी ने मुस्लिम प्रत्याशी भी उतारे थे, वहां भी मुस्लिम मतदाताओं ने विकल्प की तलाश में सपा का समर्थन किया।  लेकिन पार्टी का यह भी मानना है कि मुसलमानों के पूरी तरह सपा के पक्ष में जाने से एक दूसरे वर्ग में भी एकतरफा भाजपा को वोट देने की सोच विकसित हुई जिसके कारण मामला पूरी तरह भाजपा के पक्ष में चला गया।   
विज्ञापन


पार्टी ने माना है कि केवल मुस्लिम वोटरों ने ही उसका साथ नहीं छोड़ा, बल्कि उसके धुरसमर्थक रहे जाटव और अन्य दलित वोटरों ने भी बदलाव की उम्मीद में सपा का साथ पकड़ लिया जिसके कारण पार्टी का मत प्रतिशत आश्चर्यजनक तरीके से कम हो गया। पार्टी अपने इन मतदाताओं में एक बार फिर उम्मीद जगाने का काम करेगी और उन्हें अपने खेमें में लाने की कोशिश करेगी।

लखनऊ में बुलाई गई समीक्षा बैठक में मौजूद बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला को बताया कि मायावती ने पार्टी के निराश कार्यकर्ताओं में भरोसा पैदा किया। उन्होंने कहा कि जिस भी समुदाय ने एक विकल्प की तलाश में पूरी तरह सपा का समर्थन किया, उसके बाद भी सपा उन्हें वह विकल्प देने में नाकाम रही। उसका अधिकतम वोट प्रतिशत 32 के आसपास जाकर ठिठक गया।

ऐसे में अब कार्यकर्ता मतदाताओं को यह बताएं कि सपा की अधिकतम सीमा सामने आ चुकी है, और अब भाजपा को रोकने के लिए वे बसपा पर भरोसा करें। पार्टी अब संगठनात्मक रूप से उच्च पदाधिकारियों को बनाए रखते हुए निचले स्तर पर कमेटियों का पुनर्गठन करेगी। इसके जरिए सर्वजन हिताय वाली राजनीति को आगे बढ़ाएगी और हर समुदाय से समर्थन हासिल करेगी।

आकाश आनंद नेशनल कोऑर्डिनेटर की भूमिका में रहेंगे, जबकि तीन अन्य कोऑर्डिनेटर बनाकर यूपी में पार्टी को जमीनी मजबूती दी जाएगी। भीम राजभर के कामकाज से पार्टी संतुष्ट है और उन्हें फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बरकरार रखा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें