उत्तर प्रदेश के मथुरा में बीते गुरुवार को हुई हिंसा में सिर्फ जवाहर बाग ही नहीं उजड़ा बल्कि 126 बच्चों के सपने भी उजड़ गए। इनमें से 73 बच्चे तो बिना किसी गुनाह के जेल पहुंच गए हैं। जवाहर बाग पर करीब ढाई साल से कब्जा जमाए रामवृक्ष यादव के समर्थकों में से कई अपने परिवार यानी पत्नी और बच्चों के साथ थे।
जब पुलिस कार्रवाई हुई तो उनमें से कुछ मारे गए और कुछ को पुलिस ने जेल भेज दिया। जवाहर बाग को खाली कराने के बाद पुलिस ने 97 महिलाओं को जेल में रखा है। इन महिलाओं में से जिनके साथ छोटे बच्चे हैं, उन्हें भी अपनी मां के साथ जेल में ही रखा गया है। वजह ये है कि अगर बच्चे की उम्र छह साल से कम हो और मां जेल में हो तो उस बच्चे को भी जेल में रहने की अनुमति होती है। जेल में पहले ही तादात से ज्यादा कैदी हैं।
ऐसे में इन मासूमों के लिए जेल का परिवेश मुश्किलों का ठिकाना बन गया है। बच्चों के लिए जेल में पर्याप्त जगह होने के सवाल पर मुथरा जेल के सुपरिटेंडेंट पीडी सलोनिया कहते हैं, "जगह नहीं है हमारे यहां। क्षमता से ज्यादा कैदी होने की समस्या तो पूरी जेल में है। हमारे यहां क्षमता से तीन गुना ज्यादा कैदी हैं।" भीड़ भरी जेल में अपनी मांओं के साथ रखे गए बच्चों की स्थिति के बारे में महज कल्पना ही की जा सकती है। चिंताजनक स्थिति छह से नौ साल के उन बच्चों की भी है जिन्हें मथुरा के बाल सुधार गृह में रखा गया है।
'बाल गृह में रह रहे क्षमता से ज्यादा बच्चे'
जवाहरबाग में पुलिसवाले
जवाहर बाग से आजाद हुए बच्चों में से कौन कहा हैं, इस सवाल पर मथुरा के अपर जिलाधिकारी अजय कुमार अवस्थी बताते हैं, "जो बच्चे निकले थे उनमें 10 से 15 साल की उम्र के 23 लड़के थे। उनको राजकीय बाल सुधार गृह फिरोजाबाद भेजा गया है।
10 साल से बड़ी उम्र की 21 लड़कियां थीं जिन्हें मथुरा के राजकीय महिला शरणालय में रखा गया है। छह से नौ साल के नौ बच्चे हैं जिन्हें मथुरा के राजकीय बालगृह में रखा गया है।" फिरोजाबाद भेजे गए 23 बच्चों के लिए भी हर दिन कठनाई भरा साबित हो रहा है। इन बच्चों के पहुंचने के बाद यहां का बाल गृह भी क्षमता से ज्यादा भर गया है। बाल गृह के पर्यवेक्षक सुनील कुमार कहते हैं, "हमारे यहां 50 बच्चों की क्षमता है।
अब कुल 55 बच्चे रह रहे हैं। मथुरा से तीन जून को हमारे यहां 23 बच्चे आए हैं। इन बच्चों की उम्र 11 से 15 साल के बीच है।" जवाहर बाग से फिरोजाबाद पहुंचे बच्चों की सुविधाओं को लेकर शिकायत नहीं है। लेकिन वो हर वक्त अपने माता-पिता को याद करते हैं। इन बच्चों में से एक नीरज हैं। जो मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। उन्होंने फोन पर बीबीसी को बताया, "यहां कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन मम्मी-पापा की याद आती है। जवाहर बाग में मेरे पापा दो महीने से रह रहे थे।
हमको एक महीना हो गया था। अब मां जेल में हैं और पापा कहां हैं ये पता नहीं।" मथुरा प्रशासन का दावा है कि वो बाल गृहों में रखे गए इन बच्चों को उनके माता-पिता से मिलाने की कोशिश में है। लेकिन इनमें से कई के परिजन जेल में है, ऐसे में इनके इंतजार की घड़ियां जल्दी खत्म होने के आसार नहीं हैं।