सिक्किम के नाथू ला में मंगलवार सुबह हुए भारी हिमस्खलन में फंसे यूपी के दो पर्यटकों समेत सात की मौत हो गई। हादसे में 23 पर्यटकों को बचा लिया गया। इनमें गहरी घाटी से निकाले गए छह सैलानियों समेत 11 की हालत नाजुक है। मृतकों में चार पुरुष, दो महिलाएं व एक बच्चा है। इनमें तीन नेपाली नागरिक हैं। आशंका है कि अब भी कुछ लोग बर्फ में दबे हो सकते हैं। इस भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दुख जताया है।
सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि हिमस्खलन मंगलवार सुबह करीब 11:10 बजे, गंगटोक को नाथू ला से जोड़ने वाले जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर हुआ। करीब 30 पर्यटकों के साथ 5-6 वाहन हिमस्खलन की चपेट में आ गए। सेना, राज्य आपदा प्रबंधन दल और पुलिस की मदद से लोगों को निकाला गया। सड़क से बर्फ हटाने के बाद रास्ते में फंसे 350 पर्यटकों और 80 वाहनों को वापस लाया गया है।
एनडीआरएफ की और टीमों की आवश्यकता नहीं
NDRF के मुताबिक, डीएम गंगटोक से प्राप्त टेलीफोनिक जानकारी के अनुसार, सभी पर्यटकों और पर्यटक वाहनों का आंकलन कर लिया गया है। अभियान फिलहाल रोक दिया गया है। एनडीआरएफ की और टीमों की आवश्यकता नहीं है। हताहत पर्यटकों का विवरण बाद में साझा किया जाएगा। हालांकि, सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से प्राप्त एक रिपोर्ट के अनुसार, 12 पर्यटकों का सोचागंग में इलाज चल रहा है और सात की कथित तौर पर मौत हो गई है।
गंगटोक-नाथू ला रोड पर एक और भूस्खलन
भारतीय सेना ने बताया कि गंगटोक-नाथू ला रोड पर शाम 5.35 बजे उसी स्थान पर एक और भूस्खलन हुआ। हिमपात भी शुरू हो गया है जिससे बचाव अभियान में दिक्कत आ रही है। अधिक भूस्खलन के डर से जिला प्रशासन द्वारा बचाव और तलाशी अभियान बंद कर दिया गया है।
सीएम तमांग ने जताया दुख
सिक्किम CM प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि यह एक दुखद घटना है। राज्य और NDRF के अधिकारियों द्वारा बचाव अभियान चलाया गया, 7 लोगों की मृत्यु हुई है। हम पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मृतक कहां से थे। यदि और पर्यटकों के फंसे होने की जानकारी मिलती है तो हम कल फिर से बचाव अभियान चलाएंगे।
पूर्वी सिक्किम जिला भूस्खलन के लिहाज से नौवां सबसे संवेदनशील जिला
सिक्किम का पूर्वी जिला भूस्खलन घनत्व और जोखिम के मामले में देश के सभी जिलों में नौवें स्थान पर है। भूस्खलन घनत्व सड़क के प्रति एक किलोमीटर हिस्से में भूस्खलन की संख्या दर्शाता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय सुदूर संवेदी केंद्र (एनआरएससी) द्वारा जारी ‘लैंडस्लाइड एटलस ऑफ इंडिया’ के अनुसार, सिक्किम में 2011 और 2017 के बीच 1,561 भूस्खलन हुए, जिनमें से अधिकांश भूकंप या भारी वर्षा से उत्पन्न घटना-आधारित भूस्खलन की श्रेणी में आते हैं। सिक्किम का दक्षिण जिला देशभर में भूस्खलन घनत्व और जोखिम के मामले में आठवें स्थान पर है।