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उड़ी शहीदों के परिजनों का सवाल- 5 के बदले 10 सिर काटने के वादे का क्या हुआ?

Tue, 20 Sep 2016 04:58 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू कश्मीर के उड़ी में सेना के मिलिट्री बेस पर हुए हमले के बाद देश बेहद आक्रोश में है। शहीदों के परिजनों ने हमले के बाद सरकार की ओर उठाए जाने वाले कदमों को लेकर सवाल करने शुरू कर दिए हैं। शहीदों के परिजन आक्रोश में है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने 18 शहीदों के परिजनों से बातचीत की। शहीदों के परिजन सरकार से आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। 
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78 वर्षीय जगनारायण सिंह 44 वर्षीय शहीद हवलदार अशोक कुमार सिंह के पिता है। सिंह मोदी सरकार से काफी नाराज हैं। जगनारायण कहते हैं, 'केंद्र सरकार आतंकवाद से निपटने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही है। ये वही सरकार है जो पांच सिर के बदले 10 सिर काटने की बात कहती थी।'

27 वर्षीय लांस नायक चंद्रकांत गलांदे मध्य प्रदेश क सतारा के रहने वाले हैं। चंद्रकांत के दो और भाई सेना में हैं। चंद्रकांत के पिता शंकर गलांदे कहते हैं कि जब वो आतंकी हमलों में नौजवानों सैनिकों के मारे जाने की खबर सुनते थे, तो अपने बेटों को वापस बुला लेने के बारे में सोचते थे। शंकर कहते हैं, 'मुझे हमेशा लगता था कि अपने तीनों बेटों को वापस बुला लूं, लेकिन उसके बाद लोगों को क्या जवाब दूंगा कि मैं भी इसी धरती का रहने वाला हूं।' शंकर सवाल करते हैं कि क्या अपने दो बेटों को सुरक्षित देखने की अभिलाषा रखना गलत है? क्या सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि हमारे बेटे इस तरह न मारे जाएं।
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'अगर वो मेरे सामने आए, तो मैं उन्हें मार दूंगी।'

- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
उड़ी हमले में शहीद सिपाही नैमन कुजुर की पतनी बिना टिग्गी कहती हैं कि सरकार को आतंकियों या पाकिस्तान जो भी जिम्मेदार हो। उसके खिलाफ एक्शन लेना चाहिए। बीना खुद भी सेना में शामिल होने के लिए तैयार हैं। वो कहती हैं, 'अगर वो मेरे सामने आए, तो मैं उन्हें मार दूंगी।' उड़ी हमले से एक दिन पहले अपने पति से बात करने वाले बीना को अब अपने तीन वर्षीय बेटे अभिनव के पालन पोषण की चिंता है। 

23 वर्षीय शहीद सिपाही गंगाधर दालुई के सहपाठी और बेस्ट फ्रेंड 23 वर्षीय शेख रियाजुल रहमान अपने दोस्त की मौत के साथ-साथ भारत सरकार के रवैए से भी दुखी हैं। रहमान ने कहा, 'पाकिस्तानी दुनिया का सबसे बदकार मुल्क है। हमारी सरकार क्या कर रही है, क्या वो नकारा और निकम्मी है। पाकिस्तानियों को पता है कि हमारी सरकार नरम है। हमें उन्हें सबक सिखाना होगा।'

 बिहार के गया के 40 वर्षीय शहीद नायक सुनील कुमार विद्यार्थी अपने पीछे पत्नी, तीन बेटियों और एक बेटे का परिवार छोड़ गए हैं। 1998 में भारतीय सेना भर्ती हुए सुनील के पिता मथुरा यादव कहते हैं, 'हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार कार्रवाई करे जिससे मेरे बेटे की शहादत बेकार न जाए। 
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जवाबी कार्रवाई न करने तक भूख हड़ताल

- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
यूपी के जौनपुर निवासी 33 वर्षीय सिपाही राकेश सिंह के घरवालों ने सरकार के जवाबी कार्रवाई न करने तक भूख हड़ताल की बात कही है। राकेश के भाई हरहंगी सिंह ने कहा, 'हम एक निवाला भी नहीं खाएंगे जब तक कि हमें केंद्र सरकार के कड़े कदम की सूचनाा नहीं मिल जाती। यदि जरूरत पड़ी तो हम पटना और दिल्ली में प्रदर्शन भी करेंगे। हमने परिवार का सितारा खो दिया है। राकेश हमेशा से वर्दी पहनना चाहता था। बाकी लोगों के लिए वह एक अन्य सिपाही होगा, लेकिन एक भाई के खोने का मतलह क्या होता है, यह हमें पता है।'

राजस्थान के राजाना के रहने वाले 48 वर्षीय शहीद हवलदार निंब सिंह रावत ने एक हफ्ते पहले अपने परिवार वालों से फोन पर बातचीत की थी। उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं। निंब सिंह के छोटे भाई राशू ने ईएनएस से फोन पर कहा - 'सरकार को हमेशा के लिए आतंकवाद को खत्म करने पर विचार करना चाहिए। अगर जरूरत हो तो पाकिस्तान पर हमला करो, लेकिन कृपया इस मुसीबत और हमारे  सैनिकों की जान से जुड़ी आशंका को खत्म करो।' 

किसान के बेटे 25 वर्षीय शहीद टीएस सोमनाथ महाराष्ट्र के नासिक के रहने वाले थे। सोमनाथ अपने चार भाइयों बहनों में सबसे छोटे थे। सोमनाथ के साल ज्ञानेश्वर चावांके ने बताया कि वो इससे पहले बिहार, पश्चिम बंगाल और भूटान में अपनी सेवाएं दे चुके थे।  जम्मू कश्मीर में वो करीब ढाई महीने पहले नियुक्त हुए थे। चावांके भी चाहते हैं कि सरकार उड़ी हमले के बाद सख्त कार्वाई करे। चावांके सवाल करते हैं कि आखिर ये कितनी बार होगा? सरकार को ये सुनिश्चित करने के लिए कुछ करना चाहिए कि ऐसा दोबारा नहीं होगा?"

22 वर्षीय शहीद सिपाही विश्वजीत घोराई की 20 वर्षीय बहन बुलती घोराई ने कहा, 'मैं अपने परिवार के किसी सदस्य को कभी सेना में नहीं जाने दूंगी। पैसे से आदमी की कमी पूरी नहीं की जा सकती। क्या पैसे से मेरा भाई वापस आ सकता है?' पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के रहने वाले घोराई के दो चचेरे भाई भी सेना में हैं। विश्वजीत 21 अगस्त को उड़ी में तैनात हुए थे। 
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