इंग्लैंड के मार्क फेलिक्स दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान बने। रविवार को डालिम्स सनबीम स्कूल परिसर में संपन्न स्ट्रांगमैन वर्ल्ड कप में मार्क ने अपनी बादशाहत साबित की। वर्ल्ड कप के छह में से तीन मुकाबलों में मार्क फेलिक्स पहले स्थान पर रहे।
इस कामयाबी के साथ ही मार्क ने वर्ल्ड चैंपियन होने का गौरव हासिल किया। हालांकि एस्टोनिया के लंबे कद काठी के खिलाड़ी टर्मो मिट से उन्हें कड़ी चुनौती मिली मगर फारमर्स वॉक और कार होल्ड इवेंट में मार्क ने टर्मो को पीछे छोड़ वर्ल्ड के स्ट्रांगेस्ट मैन की टाइटिल पर अपना नाम लिखा लिया।
वर्ल्ड स्ट्रांगमैन फेडरेशन की ओर से वाराणसी में आयोजित दो दिवसीय प्रतियोगिता में दूसरे दिन रविवार को चार मुकाबले हुए। सुबह फारमर्स वॉक में मार्क फेलिक्स अपने सभी 12 प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहे। इस इवेंट में 260 किलोग्राम का भार उठाकर खिलाड़ी को चहलकदमी करना था।
एक हाथ में 130 केजी का वेट था। इंग्लैंड के मार्क फेलिक्स यहां अव्वल रहे। उन्होंने 61.25 मीटर तक चहलकदमी की। एस्टोनिया के टर्मो मिट दूसरे स्थान पर रहे। उन्होंने 260 केजी भार लेकर 60 मीटर चहलकदमी की जबकि लिथुवानिया के डेलियस जिमिनकास (57.50 मीटर) तीसरे स्थान पर रहे।
इसी प्रकार 16 टन वजनी बस खींचने के मुकाबले में भी मार्क फेलिक्स पहले स्थान पर रहे। उन्होंने सबसे कम समय 28:17 सेकेंड में 16 टन वजनी बस को 20 मीटर तक खींचा। इस मुकाबले में सैकड़ों की संख्या में एरीना के बाहर मौजूद युवाओं ने हर-हर महादेव का जयघोष कर विदेशी खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। भारत के चैंपयन पावरलिफ्टर लेखराज ने भी इस बस को खींचकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया।
उधर, दिन के तीसरे और सबसे रोमांचक मुकाबले कार होल्ड (जैक पर खड़ी कार को उठाना) में उलटफेर देखने को मिला। विश्व कप के सबसे युवा खिलाड़ी 21 साल के आयरलैंड के मैथ्यू मैकॉय ने यहां दुनिया भर के धुरंधरों को चौंका दिया। 2300 किलोवजन को मैथ्यू ने सबसे ज्यादा समय दो मिनट 21 सेकेंड तक उठाए रख रिकार्ड बना दिया। इंग्लैंड के मार्क फेलिक्स महज तीन सेकेंड से मैकॉय की बराबरी करने से चूक गए। फेलिक्स ने दो मिनट 18 सेकेंड तक इस वजन को उठाए रखा।
बहरहाल, छह में से तीन मुकाबलों में पहले स्थान पर रहे इंग्लैंड के मार्क फेलिक्स निर्विवाद रूप से दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान रहे। वर्ल्ड स्ट्रांगमैन फेडरेशन के संस्थापक रेडकिन, अध्यक्ष प्रदीप मधोक बाबा और उपाध्यक्ष कैजाद कापड़िया ने विजेताओं को ट्राफी और नगद पुरस्कार से नवाजा। डब्लूएसएफ की ओर से सभी प्रतिभागियों और विश्व कप के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली संस्थाओं और सदस्यों को स्मृति चिह्न भेंट किया गया।