'राज्य के मंत्री ने फोन कर दिया आश्वासन'
जरांगे ने जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में एक बैठक के दौरान पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे 18 दिसंबर को विधानसभा में बयान देने वाले हैं। विधानसभा का शीतकालीन सत्र नागपुर में चल रहा है। कार्यकर्ता ने दावा किया कि राज्य के मंत्री उदय सामंत ने सुबह उन्हें फोन किया और आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बीड में तय की जाएगी अगली रणनीति
उन्होंने कहा, सरकार ने कानून पारित करने के लिए एक महीने का समय मांगा था। लेकिन, अगर वह इसका पालन करने में विफल रहती है तो अगली रणनीति 23 दिसंबर को बीड में तय की जाएगी। जरांगे ने एलान किया कि अगर सरकार आरक्षण की मांग को पूरा करने में विफल रहती है तो आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मराठों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में शामिल करने के लिए कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने और उसके अनुसार अधिनियम पारित करने का आग्रह किया।
24 दिसंबर तक का दिया था समय
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कुनबी के 54 लाख रिकॉर्ड मिले हैं और उसे मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने के लिए एक कानून पारित करना चाहिए।जरांगे ने दो नवंबर को अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी। उन्होंने शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे समुदाय की मांगों को पूरा करने के लिए सत्तारूढ़ दल को 24 दिसंबर तक का समय दिया था। आरक्षण कार्यकर्ता ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने आरक्षण के लिए विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले मराठों के खिलाफ मामले वापस नहीं लिए हैं। उन्होंने मराठों को आरक्षण दिए जाने तक नौकरियों की भर्ती पर रोक लगाने का भी आह्वान किया।
'आरक्षण लागू होने तक भर्ती रोके सरकार'
जरांगे ने कहा कि सरकार को विभिन्न विभागों के लिए चयनित 13 हजार मराठा युवाओं की नियुक्ति को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने आरक्षण लागू होने तक भर्ती नहीं रोकी तो इसके गंभीर 'परिणाम' होंगे। उन्होंने मराठाओं से अंदरूनी लड़ाई में फंसने और एकजुट रहने का आग्रह किया और कहा कि समुदाय को जल्द ही आरक्षण मिलेगा क्योंकि लड़ाई अपने चरम पर है।