सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने सोमवार को मराठा आरक्षण को लेकर वर्चुअल सुनवाई शुरू की है। पीठ ने 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर सभी राज्यों को नोटिस जारी किया और राज्य सरकारों का तर्क जानना चाह रहा है।
मराठा आरक्षण पर वकीलों और सरकार ने क्या कहा
वेणुगोपाल ने कहा, अनुच्छेद 338 बी और 342 ए प्रत्येक राज्य की शक्ति को प्रभावित करते हैं। जैसा कि मैं समझता हूं कोई भी राज्य 2018 के बाद किसी वर्ग को आरक्षण नहीं दे सकता है। इसलिए महाराष्ट्र एक वर्ग को पिछड़े वर्ग के रूप में घोषित नहीं कर सकता था।
वहीं, मराठा आरक्षण पर वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा, आरक्षण के मसले पर कई राज्यों द्वारा मुद्दे उठाए गए हैं, जो अलग-अलग विषयों के हैं। आरक्षण से जुड़े अलग-अलग मामले हैं, जो कहीं न कहीं इस मामले से जुड़े हैं।
वहीं, महाराष्ट्र सरकार के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मामले में अनुच्छेद 342ए की व्याख्या भी शामिल है। यह सभी राज्यों को प्रभावित करेगा, इसलिए सभी राज्यों को सुने बिना इस मामले में फैसला नहीं किया जा सकता।
वरिष्ठ कपिल सिब्बल ने कहा कि सभी राज्यों से सांविधानिक सवाल किया गया। कोर्ट को सिर्फ केंद्र और महाराष्ट्र की सुनवाई नहीं करनी चाहिए, बल्कि सभी राज्यों को नोटिस जारी करना चाहिए।
क्या हाईकोर्ट मंडल कमीशन मामले में आए फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं
शीर्ष अदालत महाराष्ट्र में नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में मराठों के लिए शिक्षण संस्थानों ब नौकरियों में 12 से 13 फीसदी आरक्षण देने के राज्य सरकार के निर्णय को सही ठहराए जाने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मराठा आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा रखी है।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के आदेश की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की पीठ के निर्णय (मंडल कमीशन मामले) के मानने को बाध्य नहीं है, जिसमें 50 फीसदी आरक्षण की सीमा तय की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मराठा आरक्षण देने से आरक्षण 73 फीसदी जा पहुंची है, ऐसे में सामान्य वर्ग के लोगों के लिए अवसर बेहद कम हो गए हैं।
यह है संविधान का अनुच्छेद 15(4) और 16 (4)
अनुच्छेद 15(4): राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के नागरिकों या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की उन्नति के लिये विशेष प्रावधान करने से नहीं रोका जाएगा।
अनुच्छेद 16 (4): राज्य को नागरिकों के किसी भी पिछड़े वर्ग के पक्ष में नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिए कोई प्रावधान करने से नहीं रोका जाएगा, यदि राज्य की राय में राज्य के तहत सेवाओं में उस वर्ग का पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं है।