इराक के मोसुल में मारे गए 39 भारतीयों में से कई लोगों के सिर में गोली मारी गई थी। आईएसआईएस के आतंकियों ने बड़ी बेरहमी से इस घटना को अंजाम दिया था। सोमवार को अमृतसर में लाए गए 7 लोगों के शवों को देखने के बाद मीडिया रिपोर्टस में दावा किया गया कि इन भारतीयों के सिर में गोली लगी थी। इन भारतीयों के मृत्यु प्रमाण पत्र में भी साफ लिखा गया है कि इनकी मौत की वजह सिर में गोली लगना थी।
सर्टिफिकेट में यह भी लिखा है कि ये लोग वाडी आगब में मारे गए थे जोकि मोसुल से 110 किलोमीटर दूर नाइनवेह टाउनशिप का इंडस्ट्रियल एरिया है। ये सर्टिफिकेट बगदाद में भारतीय दूतावास द्वारा 28 मार्च को जारी किये गए हैं। जिस पर असिस्टेंट कमिश्नर उमेश यादव के हस्ताक्षर हैं। इन दस्तावेजों में यह नहीं बताया गया कि यह मौतें कब हुईं। मारे गए लोगों के रिश्तेदारों ने बताया कि उन्होंने आपस में 15 जून 2014 को आखिरी बार बात की थी। इसलिए माना जा रहा है कि ये मौतें 15 जून से 20 जून के बीच हुई हैं।
इराक में जिन 39 भारतीयों में एक हरजीत मसीह की जान बच गई थी, उन्होंने भी यह कहा था कि ये मौतें 15 से 20 जून के बीच हुईं। हालांकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और वी के सिंह ने हरजीत के बयान की पुष्टि नहीं की थी। वीके सिंह ने कहा था मसीह 39 भारतीयों के ग्रुप का सदस्य नहीं था।