गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का कहना है कि अगले साल से राज्य के कसिनों में केवल पर्यटकों को प्रवेश दिया जाएगा। शुक्रवार को राज्य सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि इससे गोवा की सामाजिक रचना खराब हो रही है और यह स्थानीय लोगों में जुएं को बढ़ावा दे रहा है।
पर्रिकर ने गोवा विधानसभा को बताया, 'नीति के तौर पर गोवा के लोगों को कसिनो के प्लेइंग (जुआं खेलने) क्षेत्र में जाने की इजजात नहीं होगी। केवल पर्यटक वहां जा सकते हैं। एक बार गेमिंग आयुक्त की नियुक्त हो जाने के बाद इस संबंध में एक तंत्र स्थापित किया जाएगा और इसके विनियमन के लिए उचित नियम तैयार किए जाएंगे।' उन्होंने यह भी बताया कि अब किसी भी ऑफशोर कसिनो (नदी में तैरते हुए) को लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। जो फिलहाल राज्य में मौजूद हैं उन्हें कहीं और शिफ्ट किया जाएगा।
यह घोषणा विपक्षी पार्टियों और नागरिक समाज संगठनों की निरंतर मांगों के जवाब में आई है।
कसिनों मालिकों का कहना है कि इस तरह के निर्णय से जिसमें लाइसेंस की सालाना फीस को बढ़ाया गया है, इससे हमारा बिजनेस 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। जिसकी वजह से मजबूरन हमें दुकाने बंद करनी पड़ेंगी। इस साल की शुरुआत में सरकार ने कसिनो की वार्षिक लाइसेंस फीस को 100 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा दिया था।
2007-2012 के दौरान विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने गोवा में चलने वाले कसिनो का विरोध किया था। जिसके ज्यादातर लाइसेंस कांग्रेस शासन में दिए गए थे। टॉप भाजपा नेताओं जिसमें पर्रिकर भी शामिल थे उन्होंने कई मौकों पर ऑफशोर कसिनों को सत्ता में आने के बाद बंद करने का वादा किया था। हालांकि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने ऐसा नहीं किया जिसकी वजह से विपक्ष ने उसपर निशाना साधा था।