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7-7.5 फीसदी विकास दर बनाए रखने को और निवेश की जरूरत : मनमोहन सिंह

Sun, 27 Nov 2016 04:03 AM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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पूर्व प्रधानमंत्री और आर्थिक सुधारों के जनक मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि 7-7.5 फीसदी के सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर को बनाए रखने के लिए निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की जरूरत है। निवेश में यह वृद्धि खासतौर पर बुनियादी ढांचा क्षेत्र में होनी चाहिए। साथ ही विदेशी व्यापार को पुनर्जीवित करना भी जरूरी है। 
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पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के सालाना सत्र में मनमोहन सिंह ने कहा कि आर्थिक नीतियां इस तरह से तैयार की जानी चाहिए कि सार्वजनिक वित्तपोषण व्यवस्था पर पुनर्वितरण प्रक्रिया का दबाव न पड़े और उससे विकास की प्रक्रिया भी प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि लक्ष्य को हासिल करने के लिए सार्वजनिक वित्तपोषण, वित्तीय स्थिरता, रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और पर्यावरण सुरक्षा को समावेशी विकास से जोड़ने की जरूरत है।

वर्ष 2014 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के स्थान पर सत्ता संभालने वाली मोदी सरकार भारत को विश्व की सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बनाने की बात कह रही है। मनमोहन सिंह ने कहा कि इस समय भारत की विकास दर 7-7.5 फीसदी है, लेकिन इसे बरकरार रखने के लिए खासतौर पर बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की जरूरत है। इसके साथ ही विदेशी व्यापार खासतौर से निर्यात को बढ़ाना भी अनिवार्य है। 
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गरीबी में कमी के लिए स्थायित्व की जरूरत

फाइल फोटो
पूर्व पीएम ने कहा कि भारत 1991 के आर्थिक सुधारों के दौर से आगे बढ़कर सतत विकास के युग में प्रवेश कर गया है। अब प्राथमिकता इस तेजी को बनाए रखने मात्र की नहीं होनी चाहिए, बल्कि बहुमुखी विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए। 

गरीबी में कमी के लिए स्थायित्व की जरूरत
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत 1991 के आर्थिक सुधारों के चरण से निकलकर स्थायी विकास के नए युग की ओर बढ़ रहा है। हालांकि भारत ने कुपोषण को कम करने में सफलता हासिल नहीं की है। सिंह ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कुपोषण मानव के विकास की गति को कम करने के साथ बच्चों की मृत्यु दर में होने वाली गिरावट को भी रोकता है। 

उन्होंने कहा कि अभी के दौर में हमारी प्राथमिकता निश्चित रूप से सिर्फ विकास ही नहीं होनी चाहिए, बल्कि समानताएं रोजगार सृजन और पर्यावरण विकास जैसे बहुआयामी स्वरूपों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। 

सिंह ने कहा कि गरीबी में कमी लाने के लिए आर्थिक विकास और अर्थव्यवस्था में समग्र रूप से स्थायित्व की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आधार पर मोटे तौर पर ऐसा पाया गया है कि जिन देशों ने गरीबी को कम करने में सफलता अर्जित की है। 

वहां समानता के साथ तेजी से विकास हुआ है और यह विकास लगातार रहा है। सिंह ने कहा कि इस प्रकार की रणनीति में सार्वजनिक नीति आय उत्पत्ति की प्रक्रिया व आय के वितरण दोनों को प्रभावित करती है।
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