पूर्व प्रधानमंत्री और आर्थिक सुधारों के जनक मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि 7-7.5 फीसदी के सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर को बनाए रखने के लिए निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की जरूरत है। निवेश में यह वृद्धि खासतौर पर बुनियादी ढांचा क्षेत्र में होनी चाहिए। साथ ही विदेशी व्यापार को पुनर्जीवित करना भी जरूरी है।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के सालाना सत्र में मनमोहन सिंह ने कहा कि आर्थिक नीतियां इस तरह से तैयार की जानी चाहिए कि सार्वजनिक वित्तपोषण व्यवस्था पर पुनर्वितरण प्रक्रिया का दबाव न पड़े और उससे विकास की प्रक्रिया भी प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि लक्ष्य को हासिल करने के लिए सार्वजनिक वित्तपोषण, वित्तीय स्थिरता, रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और पर्यावरण सुरक्षा को समावेशी विकास से जोड़ने की जरूरत है।
वर्ष 2014 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के स्थान पर सत्ता संभालने वाली मोदी सरकार भारत को विश्व की सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बनाने की बात कह रही है। मनमोहन सिंह ने कहा कि इस समय भारत की विकास दर 7-7.5 फीसदी है, लेकिन इसे बरकरार रखने के लिए खासतौर पर बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की जरूरत है। इसके साथ ही विदेशी व्यापार खासतौर से निर्यात को बढ़ाना भी अनिवार्य है।