आम आदमी पार्टी भी जानती है कि मनीष सिसोदिया के बाहर आने से उसे बड़ा लाभ मिल सकता है। पार्टी के बड़े नेता भी समझ रहे हैं कि सिसोदिया की जमानत उनके लिए कितनी महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी के सभी नेताओं ने सिसोदिया की जमानत का पुरजोर तरीके से स्वागत किया है। मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि मनीष सिसोदिया के बाहर आने के बाद आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार दोनों को ताकत मिली है। अब हम और ज्यादा मजबूती के साथ जनता के काम करेंगे।
आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने कहा है कि यह सभी जानते हैं कि आम आदमी पार्टी नेताओं को बिना किसी ठोस आधार के केवल राजनीतिक प्रतिशोध के कारण जेलों में ठूंसा जा रहा है। लेकिन आज मनीष सिसोदिया के बाहर आने से सच्चाई की जीत हुई है। उन्होंने कहा है कि आम आदमी पार्टी मजबूती से यह लड़ाई लड़ेगी और जीतेगी। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अरविंद केजरीवाल भी जल्द ही जेल से बाहर आएंगे।
आम आदमी पार्टी दिल्ली के साथ साथ हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी सक्रिय हो चुकी है। अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल जनसभाओं में आम आदमी पार्टी के वादे जनता तक पहुंचाने की कोशिश में जुटी हुई हैं। लेकिन पार्टी के नेता भी मानते हैं कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की कमी पूरी नहीं हो पा रही थी। जनता की तो छोड़ें, खुद आम आदमी पार्टी के नेताओं का आत्मविश्वास भी कमजोर हुआ पड़ा था। लेकिन मनीष सिसोदिया के बाहर आने से आम आदमी को का अभियान पुरजोर तरीके से आगे बढ़ेगा। उसे इसका फायदा भी मिल सकता है।
सिसोदिया की छवि का मिलेगा फायदा
यह सच है कि अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े नेता हैं और आम आदमी पार्टी को जो वोट मिलते हैं, उसके पीछे सबसे बड़े कारण अरविंद केजरीवाल ही हैं, लेकिन दिल्ली की जनता के बीच मनीष सिसोदिया की अपनी अलग पहचान है। उनकी छवि बहुत अच्छी और साफ-सुथरी है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की जनता के बीच जो पैठ बनाई है, उसके पीछे सिसोदिया के इन कामों की बड़ी भूमिका है। दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में जो सकारात्मक बदलाव हुआ है, उसके पीछे केवल मनीष सिसोदिया को ही जिम्मेदार माना जाता है। सिसोदिया के जेल से बाहर आने के बाद आम आदमी पार्टी को उनकी इस ताकत का लाभ मिलेगा, इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है।
हम पूछेंगे जमानत पर सवाल: BJP
दिल्ली भाजपा की सचिव सारिका जैन ने अमर उजाला से कहा कि मनीष सिसोदिया के जेल से बाहर आने से आम आदमी पार्टी को कोई लाभ नहीं होगा। दिल्ली की जनता के बीच आम आदमी पार्टी की सच्चाई सामने आ चुकी है। जनता ने देख लिया है कि किस तरह उसके लिए योजनाएं बनाने के नाम पर जनता की कमाई को लूटा जा रहा था।
सारिका जैन ने कहा कि भाजपा लगातार यह सवाल पूछेगी कि सिसोदिया को जमानत क्यों मिली हुई है? अब भी उन्हें 10-10 लाख रुपये के मुचलके पर छोड़ा गया है। उन्हें हर सोमवार थाने में हाजिरी लगानी पड़ेगी। हम उनसे पूछेंगे कि उन्होंने ऐसा क्या किया है जिसके कारण उनका पासपोर्ट जब्त हो गया है। भाजपा नेता के अनुसार आम आदमी पार्टी की असलियत सामने आने के कारण अब जमानत से कोई लाभ नहीं होगा।
कम नहीं हुई मुसीबत
वहीं, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे ने अमर उजाला को बताया कि मनीष सिसोदिया की मुसीबत अभी भी कम नहीं हुई हैं। सिसोदिया को केवल कानून के प्रावधानों के कारण जमानत तो मिल गई है, लेकिन उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ सकता है। यदि जमानत की अवधि में उन्होंने गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास किया तो भी अदालत इसे अदालत के नियमों का उल्लंघन मानते हुए उन्हें दोबारा जेल भेज सकती है। इसके साथ ही, अब मामला ट्रायल शुरू होने के स्टेज में आ चुका है। यदि अदालत उन्हें शराब घोटाले का दोषी पाती है तब भी उन्हें जेल जाना पड़ेगा। यानी मनीष सिसोदिया को जमानत तो अवश्य मिली है, लेकिन उनकी मुसीबतें कम नहीं हुई हैं।
मनीष सिसोदिया ने न्यायालय के सामने यह कहते हुए जमानत की अर्जी लगाई थी कि अभी तक उनके मामले की सुनवाई की शुरुआत तक नहीं हो सकी है। सुनवाई न हो पाने के कारण उन्हें तीव्रता से न्याय पाने के अधिकार से वंचित रहना पड़ रहा है। जिन धाराओं में उन पर मामले दर्ज हैं उनमें अधिकतम सात साल की सजा सुनाई जा सकती है। मनीष सिसोदिया अब तक 17 महीने की सजा काट चुके हैं। अदालत ने इसे सजा की लगभग आधी अवधि तक जेल में रहने के बराबर माना और उन्हें जमानत दे दी।
सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व में दिए गए निर्णयों के अनुसार किसी मामले में अधिकतम सजा की आधी अवधि तक जेल में बिता लेने के बाद कोई अपराधी स्वत: जमानत पाने का अधिकार पा लेता है। मनीष सिसोदिया को इसी आधार पर जमानत मिली है, लेकिन यदि जब मामले की सुनवाई अदालत में होगी तब उनकी मुसीबतें बढ़ सकती हैं। इस मामले में अब तक अदालत का जो रुख रहा है, और प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत के सामने जो साक्ष्य रखे हैं, उसे देखते हुए यही अनुमान लगाया जा रहा है कि सिसोदिया की मुश्किलें फिलहाल कम होने वाली नहीं हैं।