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Manipur: कौन दे रहा है मणिपुर में इतने घातक हथियार, क्या फिर पूर्वोत्तर में सुनाई दे रही है बड़ी आहट?

सार

प्राप्त सूचना के अनुसार म्यांमार, बांग्लादेश, चीन के तत्वों से भी मणिपुर के विद्रोहियों के पास हथियार पहुंच रहे हैं। स्यांमार में सेना अपने विद्रोहियों से लड़ाई में पिछड़ रही है। म्यांमार की सेना के शिविरों पर विद्रोही कब्जा जमा रहे हैं।
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Manipur - फोटो : PTI
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विस्तार
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मणिपुर के हालात फिर बिगड़ रहे हैं। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी के बाद सरकार ने पांच दिन के लिए इंटरनेट की सेवा पर रोक लगा दी है। वहां कुकी और मतेई समुदाय के बीच में मचा घमासान तेज हो रहा है। केन्द्रीय गृहमंत्रालय ने भी मणिपुर के हालात को काबू में करने के लिए अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सचिवालय भी पूर्वोत्तर के इस राज्य को लेकर काफी गंभीर है। दरअसल, मणिपुर में अस्थिरता फैलाने वाली ताकते ड्रोन, रॉकेट, छोटी मिसाइल जैसे हथियार का ही इस्तेमाल नहीं कर रही हैं, बल्कि कुछ अन्य की भी सूचना आ रही है।

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विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी मणिपुर से आते हैं। नाम न छापनेकी शर्त पर कहते हैं कि मणिपुर 60-70 साल पीछे चला गया है। मणिपुर में ईसाई, मुस्लिम, कुकी, मैतेई समुदाय के लोग रहते हैं। उनमें खाई बहुत चौड़ी हो चुकी है। भारत सरकार के अफसर का कहना है कि मणिपुरी होने के नाते कह रहा हूं कि इस खाई को चौड़ी होने देने में मणिपुर की राज्य सरकार, देश की केन्द्र सरकार दोनों जिम्मेदार हैं। वहां की पुलिस और सुरक्षा बलों, सेना को सेवाएं दे रहे लोगों में वहां के समुदायों को लेकर विभाजन की रेखा साफ-साफ है। वरिष्ठ अफसर का कहना है कि मैतेई और कुकी दोनों तरह-तरह के हथियार का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सीमापार के अराजक तत्व भी दे रहे हैं मणिपुर में अस्थिरता को हवा
प्राप्त सूचना के अनुसार म्यांमार, बांग्लादेश, चीन के तत्वों से भी मणिपुर के विद्रोहियों के पास हथियार पहुंच रहे हैं। स्यांमार में सेना अपने विद्रोहियों से लड़ाई में पिछड़ रही है। म्यांमार की सेना के शिविरों पर विद्रोही कब्जा जमा रहे हैं। इन विद्रोहियों के साथ मणिपुर के अराजक तत्वों के भी रिश्ते हैं। यहीं स्थिति बांग्लादेश के रोहिंग्या मुसलमानों की है। सुरक्षा एजेंसी के सूत्र का कहना है कि रोहिंग्या और मणिपुर के कुछ अराजक तत्वों में पहले भी नशे के सामान, हथियारों आदि के रिश्ते रहे हैं।
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बताते हैं कि मणिपुर के लोगों से प्राप्त के हथियार में चीन के हथियारों के भी सबूत मिल रहे हैं। आखिर कौन मोर्टार, स्नाइपर, आईडी, राइफल, पिस्तोल समेत कौन दे रहा है हथियार? इससे पहले सीआरपीएफ कैंप पर भी मणिपुर में लोगों ने हमले किए। आज राजभवन छात्रों का हुजूम जा रहा था। विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और सुरक्षा बलों में संघर्ष हुआ। इस दौरान दोनों तरफ से एक दूसरे पर हमले हुए।

मणिपुर में आखिर कैसे आएगी शांति?
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह फुटबालर रहे हैं। मैतेई समुदाय से आते हैं। मैतेई औक कुकी समुदाय एक दूसरे को फूटी आंखों से देखना नहीं चाहते। मैतेई समुदाय के लोगों की पुलिस, प्रशासन और प्रभावी जगहों पर भागेदारी अधिक है। जबकि कुकी इस मामले में पीछे हैं। कुकी समुदाय मणिपुर की पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों पर मैतेई का पक्ष लेने का आरोप लगाता है। उन्हें उम्मीद थी कि केंद्र सरकार इस दिशा में सही कदम उठाएगी। संतुलन बनाने की पहल करेगी। लेकिन इस तरह के उपाय प्रभावी नजर नहीं आए।

केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद मणिपुर में केन्द्रीय अर्ध सैनिक बल तैनात कर दिए गए। एक तरह से कुकी और मैतेई के बीच में बफर जोन बना दिया गया। सुरक्षा बलों ने अपने तरीके से आपरेशन और शांति स्थापना के प्रयास किए, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रहे हैं। मणिपुर के आईजी (आपरेशन) आई के मुईवा के इस बयान से भी वहां की स्थिति को समझा जा सकता है। मुइवा कहते हैं कि मणिपुर पुलिस को मैतेई या कुकी पुलिस कहना ही सही नहीं है। इस बल में मैतेई, कुकी, नगा, मणिपुरी मुस्लिम, गैर मणिपुरी, हिन्दू, ईसाई भी शामिल हैं। साफ सी बात है कि इसको लेकर भी कुछ बात है।

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