पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में विधानसभा चुनावों की तारीख नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद उत्साहित भाजपा नेताओं ने अब कांग्रेस पर हमले तेज कर दिए हैं। भाजपा ने जहां सत्तारूढ़ कांग्रेस पर आर्थिक नाकेबंदी करने वाले संगठनों के साथ हाथ मिलाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है वहीं कांग्रेस ने भाजपा पर सत्ता हासिल करने के लिए विभिन्न जनजातियों के बीच मतभेदों को बढ़ावा देने और नगा संगठन एनएससीएन (आईएम) के साथ गोपनीय समझौता करने का आरोप लगाया है।
मोदी ने शनिवार को अपनी रैली में कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार में डूबे रहने और राज्य के विकास पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार सत्ता में आने पर साढ़े तीन महीने से चल रही आर्थिक नाकेबंदी खत्म कर देगी। कांग्रेस सरकार ने राज्य के विकास के लिए 15 वर्षों में जितना काम नहीं किया है भाजपा 15 महीनों में उससे ज्यादा कर दिखाएगी। अब उसके बाद स्थानीय भाजपा नेताओं ने मोदी के भाषण को ही कांग्रेस पर हमले का हथियार बना लिया है।
दूसरी ओर, कांग्रेस वोटरों को यह समझाने का प्रयास कर रही है कि आर्थिक नाकेबंदी भाजपा और उग्रवादी संगठन एनएससीएन (आईएम) के दिमाग की उपज है। मणिपुर कांग्रेस के प्रमुख टीएन हाओकिप का आरोप है कि भाजपा आर्थिक नाकेबंदी की आड़ में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहती थी ताकि उसे इसका सियासी फायदा मिल सके। लेकिन मणिपुर के लोग उसकी इस साजिश को समझ चुके हैं।