मणिपुर सरकार ने राज्य में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध को फिलहाल बढ़ा दिया है। अब मणिपुर में 15 जून तक इंटरनेट बंद रहेगा। आयुक्त (गृह) टी रंजीत सिंह की ओर से शनिवार रात जारी आदेश में कहा गया कि ब्रॉडबैंड सहित मोबाइल डेटा सेवाएं 15 जून की दोपहर तीन बजे प्रतिबंधित रहेंगी। यह प्रतिबंध तीन मई को लगाया गया था।
आदेश में कहा गया कि कुछ असामाजिक तत्व फर्जी तस्वीरों, अभद्र भाषा, घृणास्पद वीडियो संदेशों के के जरिए अफवाह फैला सकते हैं। वे बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया का उपयोग कर जनता को भड़काने का काम कर सकते हैं। इसके राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ऐसे में सरकार ने यह फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट से भी लगा था झटका
इससे पहले बीते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा प्रभावित मणिपुर में इंटरनेट सेवाओं को बर्खास्त करने के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि उच्च न्यायालय में पहले से ही मामले की सुनवाई चल रही है। कार्यवाही को दोहराने का कोई मतलब नहीं है। इसे नियमित बेंच के सामने ही आने दें। मणिपुर में 3 मई से भड़की इस हिंसा के चलते सरकार ने एहतियातन राज्य में इंटरनेट सेवाएं बंद की हुई हैं। ऐसे में वकील चोंगाथम विक्टर सिंह और बिजनेसमैन मायेंगबम जेम्स ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इंटरनेट सेवा बहाल करने की मांग की थी।
तीन मई को पहली बार भड़की हिंसा
मणिपुर में एक महीने पहले भड़की हिंसा में कम से कम 100 लोगों की जान चली गई थी और 310 अन्य घायल हो गए थे। अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद पहली बार तीन मई को झड़पें हुईं थीं। मेइती मणिपुर की आबादी का लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। जनजातीय नागा और कुकी जनसंख्या का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में निवास करते हैं।