मणिपुर के कंगपोकपी जिले में शुक्रवार को एक रैली के दौरान हिंसा हो गई, जिसमें कम से कम पांच प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बल के कुछ जवान घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने आंसूगैस के गोले छोड़े जिसमें दो लोग घायल हो गए। दोनों घायलों को कंगपोकपी के जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद आगे के इलाज के लिए इंफाल रेफर कर दिया गया है।
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली मणिपुर कैबिनेट ने शुक्रवार को दो विद्रोही समूहों कुकी नेशनल आर्मी (केएनए) और जोमी रिवोल्यूशनरी आर्मी (जेडआरए) के साथ त्रिपक्षीय वार्ता से हटने का फैसला किया। एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि चुराचंदपुर, कंगपोकपी और तेंगनौपाल जिलों में आयोजित रैलियों और कंगपोकपी जिले में पुलिस के साथ झड़प के बाद मणिपुर कैबिनेट ने विभिन्न जिलों में कानून व्यवस्था की समीक्षा की।
राज्य के कुछ हिस्सों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किए जाने के खिलाफ विरोध रैली शुक्रवार को हिंसक हो गई जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए।कंगपोकपी जिले में भीड़ से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को बल प्रयोग करना पड़ा। एक वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकते हुए दिखाया गया है।
कैबिनेट के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस बात पर ध्यान दिया गया है कि जिस वजह से रैलियों का आयोजन किया गया था वह असंवैधानिक है और इसलिए यह रैलियां अवैध थीं। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि विस्तार से विचार-विमर्श के बाद, मंत्रिमंडल ने राज्य सरकार को दो पहाड़ी-आधारित विद्रोही समूहों, कुकी नेशनल आर्मी (केएनए) और जोमी रिवोल्यूशनरी आर्मी (जेडआरए), जिनके नेता राज्य के बाहर के हैं, के साथ त्रिपक्षीय वार्ता / एसओओ (ऑपरेशन का निलंबन) समझौतों को वापस लेने का फैसला किया है। बता दें कि जेडआरए के अध्यक्ष म्यांमार के हैं जबकि केएनए का नेतृत्व एक होकिप करता है जो नागालैंड से है।
बयान में कहा गया है, राज्य के सभी मूल निवासी राज्य सरकार के साथ हैं। पुलिस के साथ झड़प विशेष रूप से एक जिले में बेदखली नोटिस जारी करने के बाद हुई और प्रदर्शनकारियों को इन एसओओ समूहों द्वारा प्रभावित किया जा रहा है। मणिपुर सरकार के एक सूत्र ने बताया कि प्रदर्शनकारी खुले तौर पर भारत सरकार के संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ जा रहे हैं।