सार
अधिकारियों ने बताया कि सुबह तीन बजे से छह बजे तक शांति रही। हालांकि, इसके बाद फेयेंग और सिंगदा गांवों से अंधाधुंध गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। उन्होंने कहा कि गोलीबारी कांगपोकपी जिले के कांगचुप इलाके के गांवों और पहाड़ियों को निशाना बनाकर की गईं।
मणिपुर में भड़की हिंसा के खिलाफ लोग।
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मणिपुर में लगातार हिंसा जारी है। इंफाल पश्चिम और कांगपोकपी जिलों के दो गांवों में हिंसक झड़पों में एक नागरिक की मौत हो गई और दो घायल हो गए। दोनों जिलों के कांगचुक क्षेत्र के फेयेंग और सिंगदा गांवों से अंधाधुंध गोलीबारी की घटनाएं सामने आईं। पहले अधिकारियों ने बताया था कि हिंसा में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई है, लेकिन बाद में यह स्पष्ट हुआ कि पीड़ित एक आम नागरिक था, जिसके पास .303 राइफल थी। आशंका जताई जा रही है कि वह पुलिस शस्त्रागार से चोरी हो गई थी।
अधिकारियों ने बताया कि गेलजांग इलाके की संयुक्त तलाशी ली गई और मौके से .303 राइफल के साथ एक शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान सैखोम सुबन सिंह (26) के रूप में की गई है, जो इंफाल पश्चिम जिले में झड़प स्थल से 25 किमी दूर गांव नाओरेमथोंग अचोम लीकाई का रहने वाला था।
यह है मामला
गौरतलब है, मणिपुर में 3 मई को भड़की जातीय हिंसा में अब तक करीब 150 लोगों की जान जा चुकी है और कई हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। दरअसल, मणिपुर का मेइती समुदाय उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग कर रहा है। इसके खिलाफ तीन मई को राज्य के पर्वतीय जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया, जिसके बाद राज्य में हिंसा शुरू हो गई।
ऐसे शुरू हुई हिंसा
तनाव की शुरुआत चुराचंदपुर जिले से हुई। ये राजधानी इम्फाल के दक्षिण में करीब 63 किलोमीटर की दूरी पर है। इस जिले में कुकी आदिवासी ज्यादा हैं। गवर्नमेंट लैंड सर्वे के विरोध में 28 अप्रैल को द इंडिजेनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने चुराचंदपुर में आठ घंटे बंद का ऐलान किया था। देखते ही देखते इस बंद ने हिंसक रूप ले लिया। उसी रात तुइबोंग एरिया में उपद्रवियों ने वन विभाग के ऑफिस को आग के हवाले कर दिया। 27-28 अप्रैल की हिंसा में मुख्य तौर पर पुलिस और कुकी आदिवासी आमने-सामने थे।
इसके ठीक पांचवें दिन यानी तीन मई को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर ने 'आदिवासी एकता मार्च' निकाला। ये मैतेई समुदाय को एसटी का दर्जा देने के विरोध में था। यहीं से स्थिति काफी बिगड़ गई। आदिवासियों के इस प्रदर्शन के विरोध में मैतेई समुदाय के लोग खड़े हो गए। लड़ाई के तीन पक्ष हो गए।
एक तरफ मैतेई समुदाय के लोग थे तो दूसरी ओर कुकी और नागा समुदाय के लोग। देखते ही देखते पूरा प्रदेश इस हिंसा की आग में जलने लगा। चार मई को चुराचंदपुर में मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की एक रैली होने वाली थी। पूरी तैयारी हो गई थी, लेकिन रात में ही उपद्रवियों ने टेंट और कार्यक्रम स्थल पर आग लगा दी। सीएम का कार्यक्रम स्थगित हो गया था।