हिंसाग्रस्त मणिपुर शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सेना और असम राइफल्स के जवान अनूठे प्रयोग कर रहे हैं। वे लगातार लोगों से मिल रहे हैं। समुदाय के लोगों से मिलकर बातचीत कर रहे हैं। साथ ही समूहों को एक साथ बिठाकर शांति बहाली की कोशिश की जा रही है। गश्ती दलों ने एक नया प्रयोग किया है, 'सफेद झंडा' अभियान। इसे पूरे अभियान को अपार जनसमर्थन मिल रहा है।
लोगों के समर्थन से सफलता मिलेगी
सेना सूत्रों के मुताबित जबसे मणिपुर में हिंसा भड़की है। वहां शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए यह अभियान छह जिलों के 15 से अधिक गांवों में इसकी शुरुआत की गई है। सेना को भी पूरा विश्वास है कि लोगों के समर्थन से इसे सफलता मिलेगी। भारतीय सेना और असम राइफल्स लगातार सुरक्षा स्थिति बहाल करने की दिशा में काम कर रहे हैं। नागरिक प्रशासन और नागरिक समाज संगठनों के समन्वय से मणिपुर भर में विशेष रूप से चुराचंदपुर, बिशनपुर, केपीआई, काकचिंग और इंफाल पश्चिम जिलों में सुरक्षा बैठकों का आयोजन किया जा रहा है।
बैठकों के साथ-साथ गश्ती दल अनौपचारिक रूप से 'डोर टू डोर बातचीत' कर रहे हैं। इससे विभिन्न जातीय समुदायों के बीच गहराते विभाजन को पाटने में मदद मिल रही है।
शांति नकारने वालों को अप्रत्यक्ष रूप से जवाब मिलेगा
एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि यह एक बहुत अच्छा प्रयास है। इससे शांति बहाली में मदद मिलेगी। ग्रामीण इलाकों के बच्चे, बूढ़े और जवान सभी अपने-घरों में सफेद झंडा लगा रहे हैं। इससे शांति को नकारने वालों को अप्रत्यक्ष रूप से जवाब मिलेगा। पहाड़ियों और मैदानों फिर से जोड़ने का प्रयास जारी है। इससे निश्चित ही एक अच्छा संदेश जाएगा और लोग जागरूक होंगे