मणिपुर में नगा समुदाय के शीर्ष संगठन ने एलान किया है कि वह आठ सितंबर की आधी रात से राज्य के नगा-बहुल इलाकों में 'व्यापारिक प्रतिबंध' लागू करेगा। यह फैसला भारत-म्यांमार सीमा पर फ्री मूवमेंट रेजीम (एफएमआर) को खत्म करने और सीमा पर बाड़ लगाने के विरोध में लिया गया है।
इस व्यापारिक प्रतिबंध के तहत उन सभी नगा बहुल जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर मालवाहक वाहनों की आवाजाही को रोका जाएगा। इनमें सेनापति, उखरूल, चंदेल, तमेंगलोंग, कामजोंग और नोनी जिले शामिल हैं।
बयान में कहा गया, एफएमआर को एकतरफा खत्म करने और जबरन सीमा पर बाड़ लगाने के मुद्दे पर नगा लोगों ने स्पष्ट रूप से ज्ञापन, आंदोलन, प्रदर्शन, सार्वजनिक रैलियों, और कई प्रेस बयानों के जरिए 19 जनवरी 2024 से अब तक बहुत शालीनता के साथ लोकतांत्रिक ढंग से अपनी भावनाएं केंद्र सरकार के सामने जताई हैं। इसके बावजूद सरकार का उदासीन रवैया हमें एफएमआर को खत्म करने और सीमा पर जबरन बाड़बंदी के विरोध में एक सख्त आंदोलन करने को मजबूर कर रहा है, जिससे हमारी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज हो सके।
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मणिपुर की म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। राज्य में नगा संगठन एफएमआर को खत्म करने और सीमा पर बाड़ के काम का विरोध कर रहे हैं। मणिपुर में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति असम जैसे अन्य राज्यों से आती है। राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (दीमापुर से इम्फाल) सेनापति जिले से होकर गुजरता है और यह मणिपुर का सबसे अहम राष्ट्रीय राजमार्ग है। राष्ट्रीय राजमार्ग-37 (सिलचर से इम्फाल) तमेंगलोंग और नोनी जिलों से होकर गुजरता है।
संयुक्त नगा परिषद ने बुधवार रात एक बयान जारी कर कहा, जैसाकि 11 अगस्त को हुई परिषद की बैठक में चर्चा हुई थी और निर्णय हुआ था, हम यह घोषणा करते हैं कि आठ सितंबर 2025 की मध्यरात्रि से सभी नगा इलाकों में व्यापारिक प्रतिबंध लागू किया जाएगा, जब तक कि अगली सूचना न दी जाए। संगठन ने नगा लोगों से इस 'व्यापारिक प्रतिबंध' का समर्थन करने की अपील की है।